कोलकाता, 10 मार्च (हि.स.)।

पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद ने राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सूचित किया है कि इस वर्ष उच्च माध्यमिक उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य से शिक्षकों को छूट नहीं दी जा सकती। परिषद ने इसके पीछे माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की भारी कमी को कारण बताया है।
संस्थानों को भेजे गए पत्र में परिषद ने कहा कि राज्य में परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या के मुकाबले शिक्षकों की संख्या बहुत कम है, इसलिए मूल्यांकन प्रक्रिया में सभी उपलब्ध शिक्षकों को लगाना आवश्यक हो गया है।
परिषद ने सोमवार को प्रधानाध्यापकों को भेजे गए पत्र में कहा, “आप इस तथ्य से अवगत हैं कि हमारे राज्य में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्रों की संख्या की तुलना में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। इसलिए परिषद किसी भी शिक्षक को उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन ड्यूटी से छूट नहीं दे सकती।”
परिषद के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि मूल्यांकन कार्य से किसी शिक्षक को मुक्त करने के अनुरोध सामान्यतः स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
सेमेस्टर आधारित उच्च माध्यमिक परीक्षाएं 27 फरवरी को समाप्त हुई थीं। सितंबर में आयोजित तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा में असफल रहे छात्रों ने 12 फरवरी से 27 फरवरी के बीच चौथे सेमेस्टर की परीक्षाओं के साथ ही पूरक परीक्षा दी।
इसके अलावा, पिछले वर्ष पुराने वार्षिक प्रणाली के तहत उच्च माध्यमिक परीक्षा में असफल रहे अंतिम बैच के अभ्यर्थियों ने भी फरवरी में आयोजित इन परीक्षाओं में भाग लिया।
परिषद के एक अधिकारी के अनुसार, इस वर्ष लगभग 7.5 लाख छात्रों ने परीक्षा दी, जिसके कारण मूल्यांकन के लिए उत्तरपुस्तिकाओं की संख्या बहुत अधिक हो गई है। इससे पहले भी शिक्षकों की कमी को देखते हुए परिषद ने कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को भी निरीक्षक (इनविजिलेटर) के रूप में नियुक्त किया था।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्कूल सेवा आयोग को 31 अगस्त तक कक्षा 12 स्तर के 12 हजार 514 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
