मंडी, 10 मार्च (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी में एल.ए.आर.ए.एम कोर्स 2026 लैंड स्लाइड रिस्क असेसमेंट एंड मिटिगेशन का शुभारंभ किया गया। यह छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भूस्खलन आपदा जोखिम को कम करने के लिए वैश्विक ज्ञान और व्यावहारिक समाधान विकसित करना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध एल.ए.आर.ए.एम कोर्स स्कूल इटली का यह कार्यक्रम भारत में दूसरी बार भौतिक रूप में आयोजित किया जा रहा है। एल.ए.आर.ए.एम स्कूल की स्थापना वर्ष 2005 में इटली के यूनिवर्सिटी ऑफ सेलर्नो के जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग ग्रुप (जीईजी) द्वारा की गई थी।

यह कार्यक्रम पीएचडी शोधार्थियों, युवा शोधकर्ताओं और सिविल इंजीनियरिंग, पर्यावरण इंजीनियरिंग, भूविज्ञान सहित अन्य क्षेत्रों के पेशेवरों के लिए उन्नत प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच बन चुका है। यह पहल आईआईटी मंडी के एक प्रमुख उद्देश्य, यानी क्षेत्रीय विकास, के अनुरूप भी है। इससे पहले इस कार्यक्रम के संस्करण इटली, चीन और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों में आयोजित किए जा चुके हैं।
आईआईटी मंडी में आयोजित एल.ए.आर.ए.एम कोर्स 2026 में स्विट्ज़रलैंड, इटली, नॉर्वे और भारत के 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। वे 40 प्रतिभागियों जिनमें शोधार्थी और विभिन्न संस्थानों के पेशेवर शामिल हैं, को व्याख्यान और प्रशिक्षण देंगे। इस पाठ्यक्रम को विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जहां भूस्खलन और ढलान अस्थिरता से समुदायों, परिवहन नेटवर्क और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर खतरा रहता है।
यह कार्यक्रम आईआईटी मंडी के सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड डिजास्टर रिडक्शन द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इसे टाटा ट्रस्ट, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन का सहयोग प्राप्त है।
इस अवसर पर सेटीमियो फ़रलीसी, जो एल.ए.आर.ए.एम स्कूल के अध्यक्ष और यूनिवर्सिटी ऑफ सेलर्नो के संकाय सदस्य हैं, ने कहा कि एल.ए.आर.ए.एम स्कूल का उद्देश्य भूस्खलन जोखिम को कम करने के लिए युवा शोधकर्ताओं का एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय समुदाय तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि हिमालय जैसे भूस्खलन-प्रवण क्षेत्र में इस कार्यक्रम का आयोजन प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर देता है।
एल.ए.आर.ए.एम कोर्स 2026 के समन्वयक और सी3डएआर के अध्यक्ष कला वेंकटा उदय ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में नाजुक भूगर्भीय संरचना, तेज़ी से हो रहा विकास और बदलते जलवायु पैटर्न के कारण भूस्खलन की चुनौतियां बढ़ रही हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा
