झांसी, 26 फ़रवरी (हि.स.)। समाजवादी पार्टी (सपा) मुखिया अखिलेश यादव के बुंदेलखंड राज्य की आवश्यता को सिरे से नकारना उनके बुन्देलखंड के प्रति सौतेले व्यवहार को दर्शाता है। जिसका खामियाजा आने वाले विधानसभा चुनाव 2027 में उन्हें उठाना होगा। यह बात भारतीय प्रजाशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित पंकज रावत ने गुरुवार को बैठक के दौरान कही।

पंडित पंकज रावत ने कहा कि बुन्देलखंड राज्य किसी पहचान का मोहताज नहीं है। अपनी विरासत और इतिहास के काराण समस्त विश्व में बेदाग पहचान रखता है। मात्र रानी लक्ष्मीबाई का नाम कहीं भी लेने से ही लोग कहने लगते हैं कि वही झांसी की रानी। साथ ही आल्हाउदल, खजुराहो मन्दिर, चन्देलों का इतिहास आदि बुन्देलखंड को अमिट छाप देता है। ऐसे में सपा प्रमुख अखिलेश यादव का राज्य निर्माण को समर्थन न देना कहीं न कहीं उनकी राजनैतिक अपरिपक्वता का दर्शाता है।

रावत ने कहा कि बुन्देलियों से छल करने वालों में एक पूर्व महिला मंत्री का नाम लिया। उन्होंने कहा कि अब राज्य निर्माण को समर्थन न देने वाले अखिलेश यादव भी इसी श्रेणी में गिने जायेेंगे। उन्होंने कहा कि जो दल बुन्देलखंड राज्य निर्माण में सहयोग नहीं करेगाज़ बुन्देली भी उसे सिरे से नकार देगा। क्योंकि 19 विधानसभाओं के साथ सत्ता की चाबी निश्चित रूप से बुन्देलियों के पास है और कहीं न कहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को उनके बयान के लिए अवश्य पछताना होगा।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष आनंद मुदगल, राजेन्द्र मिश्रा, राकेश सुरोठिया, धरन शर्मा, प्रभात रावत, अजय मिश्रा, धरन शर्मा, राधारमण उपाध्याय, एनपी सिंह, आनंद तिवारी, बीके शर्मा, राजेश तिवारी, अमित यादव, आशुतोष द्विवेदी, राकेश श्रीवास्तव, श्रुति चडडा, सुमन अहिरवार, मीना आदि उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया
