कानपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। शारीरिक के साथ मानसिक रूप से सशक्त होना भी समय की मांग है। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे बच्चियां आत्मविश्वास के साथ खुद की रक्षा कर सकें। प्रशिक्षण के माध्यम से उनमें साहस और जागरूकता विकसित हो रही है। “आत्मरक्षा प्रशिक्षण से बच्चियां आत्मनिर्भर और सशक्त बनती हैं”। यह बातें बुधवार को विभागाध्यक्ष डॉ. श्रवण यादव ने कही।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 600 बच्चियों को विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन वंदना पाठक, प्रो. अंशु यादव, डॉ. ममता तिवारी और डॉ. श्रवण यादव ने किया। इस दौरान अतिथियों ने बच्चियों को आत्मरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी और उनका मनोबल बढ़ाया।
प्रशिक्षण सत्र में कराटे प्रशिक्षक सिहान विजय कुमार सहित अन्य प्रशिक्षकों ने बच्चियों को कराटे, जुम्बा, योग और आत्मरक्षा की व्यावहारिक तकनीकें सिखाईं। बच्चियों ने उत्साह के साथ भाग लेते हुए तकनीकों को सीखा।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. श्रवण यादव ने बच्चियों को निशुल्क कराटे प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने बताया कि इच्छुक छात्राएं प्रतिदिन शाम पांच से सात बजे तक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकती हैं, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
अंत में ध्यान और योग के माध्यम से मानसिक सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत करना रहा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
