कानपुर, 10 मार्च (हि.स.)। कृषि में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह बातें मंगलवार को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशक डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने कहीं।

कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद, लखीमपुर खीरी में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रसार निदेशक डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने की। बैठक में वर्ष 2025 की प्रगति आख्या और वर्ष 2026 की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। इस दौरान कृषि विविधीकरण, गन्ने के साथ अंतः फसली खेती, पशुपालन से प्राप्त अवशेषों के उपयोग और देसी गाय के उत्पादों से जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ त्रिपाठी कहा कि किसानों को टपक सिंचाई प्रणाली को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जिससे कम पानी में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके। इसके साथ ही स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किसानों के खेतों पर विभिन्न फसलों के परीक्षण और प्रदर्शन कराए जाने चाहिए, ताकि नई तकनीकों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे।
बैठक में केंद्राध्यक्ष डॉ. एस.के. विश्वकर्मा ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित तकनीकों का जिले में तेजी से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जिससे किसानों के प्रति इकाई उत्पादन में वृद्धि हो रही है और उनकी आय में भी सुधार हो रहा है।
इस अवसर पर गन्ना शोध केंद्र जमुनाबाद के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. सर्वनाम सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी सुभाष चंद्र और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकुर वर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। प्रगतिशील किसानों ने भी खेती से जुड़े अनुभव साझा किए और फसल अवशेष प्रबंधन तथा अंतः फसली खेती को बढ़ावा देने के सुझाव दिए।
बैठक में केंद्र के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2025 की उपलब्धियों और 2026 की प्रस्तावित योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद प्रसार निदेशक ने केंद्र की विभिन्न गतिविधियों का दौरा कर उन्हें और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
