कोलकाता, 21 फरवरी (हि.स.)। दक्षिण कोलकाता के आनंदपुर थाना क्षेत्र के नाजिराबाद में बीते 26 जनवरी की मध्यरात्रि में दो गोदामों में लगी भीषण आग में मारे गए लोगों के मामले में लगभग एक महीने बाद बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हुई। डीएनए मिलान के बाद 18 मृतकों की पहचान सुनिश्चित होने पर शनिवार को उनके देहांश परिजनों को सौंप दिए गए।

आग पर काबू पाने के बाद मलबे से कुल 27 लोगों के शवों के हिस्से बरामद किए गए थे। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि अधिकांश शव बुरी तरह जल चुके थे और तत्काल पहचान संभव नहीं हो सकी थी। इसके बाद प्रशासन ने परिजनों से डीएनए नमूने लेकर परीक्षण कराया। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब तक 18 लोगों की पहचान की पुष्टि हुई है।

शनिवार सुबह संबंधित परिवारों के सदस्य नरेंद्रपुर थाने पहुंचे। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वे कांतापुकुर मार्ग गए, जहां से देहावशेष उन्हें सौंपे गए। परिजनों का कहना है कि शव के नाम पर बहुत कम अवशेष बचे हैं, लेकिन “जो कुछ मिला है, वही लेकर अंतिम संस्कार करेंगे।”
अधिकांश पीड़ित परिवार पूर्व मेदिनीपुर जिले के तमलुक, हल्दिया और नंदकुमार क्षेत्रों से हैं। सुबह से ही कई परिजन थाने के बाहर इंतजार करते दिखे। किसी ने बेटा खोया है, तो किसी ने पति या भाई को। बीते एक महीने से अनिश्चितता और मानसिक तनाव के बीच दिन काट रहे इन परिवारों के लिए पहचान की पुष्टि के साथ एक चरण का अंत हुआ है।
तमलुक निवासी देवदित्य दिंदर के चाचा ने बताया कि देवदित्य की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। वे अन्य परिवारों के साथ प्रक्रिया में सहयोग के लिए आए थे। उनका कहना है कि प्रशासन हर संभव सहायता कर रहा है।
नंदकुमार के बरगोदा गांव से सुजीत सिंह के परिवार के सदस्य भी पहुंचे। निरंजन मंडल अपने बेटे रामकृष्ण मंडल के देहावशेष लेने आए थे। उन्होंने दावा किया कि उनके भाई गोविंद मंडल की भी मृत्यु हुई है, लेकिन उनका डीएनए रिपोर्ट अभी नहीं आया है। निरंजन ने कहा कि अब भी कई लोगों की रिपोर्ट आना बाकी है।
प्रशासन के अनुसार, शेष डीएनए रिपोर्ट प्राप्त होते ही अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। ——————-
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
