पूर्वी सिंहभूम, 28 फ़रवरी (हि.स.)। विश्व नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस) के निरीक्षक संतोष कुमार ने शनिवार को कहा कि किसी भी आपदा या आपात स्थिति में प्रशिक्षित नागरिक ही राष्ट्र की वास्तविक ताकत साबित होते हैं।

शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि सिविल डिफेंस का उद्देश्य केवल युद्धकालीन सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि शांतिकाल में भी संभावित आपदाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना, नागरिकों को प्रशिक्षण देना तथा त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करना है।

संतोष कुमार ने बताया कि विश्व स्तर पर सिविल डिफेंस की अवधारणा प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विकसित हुई, जब हवाई हमलों से व्यापक विनाश हुआ। उस समय यह महसूस किया गया कि केवल सैन्य बल पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों को भी संगठित और प्रशिक्षित कर राहत एवं बचाव कार्यों में शामिल करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने सिविल डिफेंस को “चौथी सेना” की संज्ञा दी थी। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके विकास में सर जॉन एरिक हॉडसॉल की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है, जिन्होंने एयर रेड प्रिकॉशन व्यवस्था को व्यवस्थित रूप प्रदान किया।
उल्लेखनीय है कि देशभर में प्रत्येक वर्ष एक मार्च को विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस मनाया जाता है।————
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक
