मीरजापुर, 11 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद मीरजापुर के जीडी बिनानी पीजी कॉलेज में बुधवार को इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने पर एक गंभीर और ज्ञानवर्धक मंथन हुआ। भारतीय इतिहास संकलन समिति की जिला इकाई के तत्वावधान में आयोजित विचार गोष्ठी में इतिहासकारों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने इतिहास लेखन में प्रमाण और शोध की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

‘इतिहास विज्ञान आधारित अंत्याधुनिक दृष्टि’ विषय पर आयोजित इस गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए समिति के जिलाध्यक्ष प्रोफेसर इंदू भूषण द्विवेदी ने कहा कि इतिहास किसी भी राष्ट्र की सामूहिक स्मृति होता है। इसे समझने और लिखने के लिए प्रमाण, शोध और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि इतिहास को साक्ष्यों की कसौटी पर नहीं परखा गया तो आने वाली पीढ़ियों को वास्तविक ऐतिहासिक दृष्टि नहीं मिल पाएगी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जीडी बिनानी पीजी कॉलेज के प्राचार्य एवं काशी प्रांत के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रोफेसर अशोक सिंह ने कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का क्रम नहीं है, बल्कि यह प्रमाणों पर आधारित ज्ञान की एक महत्वपूर्ण विधा है। उन्होंने बताया कि पुरातात्विक साक्ष्य, अभिलेखीय दस्तावेज, शिलालेख, साहित्यिक स्रोत और वैज्ञानिक अनुसंधान इतिहास लेखन की मजबूत आधारशिला हैं। इन सभी स्रोतों के समन्वित अध्ययन से ही किसी राष्ट्र की ऐतिहासिक चेतना को सही दिशा मिलती है।
समिति की प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर अनुराधा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत अत्यंत समृद्ध है। इतिहास के अध्ययन को केवल राजनीतिक घटनाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। समाज, संस्कृति, लोकजीवन और ज्ञान परंपरा भी इतिहास की महत्वपूर्ण धाराएं हैं। उन्होंने युवाओं में इतिहास के प्रति जिज्ञासा और शोध की भावना विकसित करने पर जोर दिया।
गोष्ठी का संचालन डॉ. शशिधर शुक्ला ने किया। इस अवसर पर डॉ. ध्रुव जी पांडे, डॉ. ऋषभ कुमार, श्याम मोहन उपाध्याय और प्रो. राजेश पांडेय ने भी विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में इतिहास के क्षेत्र में शोध, दस्तावेजीकरण और स्थानीय ऐतिहासिक स्रोतों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा
