जयपुर, 06 अप्रैल (हि.स.)। राजधानी की साइबर पुलिस ने एक बड़े ई-स्क्रिप साइबर घोटाले का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच मे सामने आया कि आरोपी फर्जी आधार-पैन के जरिए डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) बनाकर डीजीएफटी-आइसगेट पोर्टल में अनधिकृत लॉगिन करते थे और निर्यातकों के खातों से सरकारी इंसेंटिव स्क्रिप्स चोरी कर बेच देते थे।

पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि साइबर थाना पुलिस की विशेष टीम ने सुल्तान खान (जोधपुर), नंद किशोर (जोधपुर), निर्मल सोनी (पाली), अशोक कुमार भंडारी (जोधपुर) और प्रमोद खत्री (जोधपुर) को गिरफ्तार किया है। इनमें चार आरोपी फर्जी डिजिटल सिग्नेचर बनाने में शामिल थे, जबकि एक मुख्य उपयोगकर्ता बताया गया है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में करीब 93 लाख रुपए की स्क्रिप्स चोरी का खुलासा हुआ है, जबकि 400 से अधिक फर्जी डिजिटल सिग्नेचर के आधार पर यह घोटाला 400 करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका है।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश ने बताया कि आरोपियों ने सबसे पहले फर्जी आधार और पैन कार्ड तैयार कर डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) बनवाए। इसके बाद डीजीएफटी पोर्टल पर लॉगिन कर कंपनियों की ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और डायरेक्टर प्रोफाइल में बदलाव कर दिया। नई आइसगेट आईडी बनाकर निर्यातकों के खातों में मौजूद आरओडीटीईपी/ आरओएससीटीएल स्क्रिप्स को अपने फर्जी आईईसी खातों में ट्रांसफर कर लिया जाता था। इसके बाद इन स्क्रिप्स को दिल्ली में सक्रिय एजेंटों के जरिए बेचकर रकम को म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कर छुपाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी डीएससी दुबई में डाउनलोड किए जाते थे, जहां से आइसगेट पोर्टल पर लॉगिन कर यह पूरी कार्रवाई की जाती थी। परिवादी के अनुसार शुरुआत में 17,88,787 रुपए की स्क्रिप्स ट्रांसफर की गई थीं, जबकि जांच में अब तक कुल करीब 93 लाख रुपए की स्क्रिप्स चोरी का खुलासा हो चुका है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि 13 से 15 सदस्यों का गिरोह इस घोटाले में सक्रिय है, जिसने 400 से अधिक फर्जी डिजिटल सिग्नेचर तैयार किए। अधिकारियों के अनुसार, एक खाते से औसतन 1 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई है, जिससे कुल घोटाला 400 करोड़ रुपए तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश
