लखनऊ, 10 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 के नियम-21 एवं नियम 24 में संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के निवेश और संपत्ति से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता लाना है। इन संशोधनों से सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

संशोधन के तहत नियम-21 में यह व्यवस्था की जा रही है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना अपने समुचित प्राधिकारी को देनी होगी। इसी तरह नियम-24 में भी बदलाव किया गया है। अब यदि कोई कर्मचारी दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की कोई चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। पहले यह सीमा एक महीने के मूल वेतन के बराबर थी। इसके अलावा अचल संपत्ति की घोषणा से संबंधित नियम में भी संशोधन किया गया है। पहले सरकारी कर्मचारियों को हर पांच वर्ष में अपनी अचल संपत्ति की जानकारी देनी होती थी, लेकिन अब यह जानकारी हर वर्ष देना अनिवार्य किया जाएगा।
भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के 7 मई 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत अधिनियम की धारा 21 से कुष्ठ रोग से संबंधित प्रावधानों को हटाया जा रहा है। साथ ही इन प्रावधानों को मेंटल हेल्थकेयर एक्ट 2017 के अनुरूप बनाया जाएगा, ताकि कानून आधुनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकार मानकों के अनुरूप हो सके।
सिखों के आनंद विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए नई नियमावली को कैबिनेट ने दी मंजूरी
कैबिनेट बैठक में सिख समुदाय के विवाह पंजीकरण को आसान बनाने के लिए उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 को प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सिख धर्म में प्रचलित ‘आनंद कारज’ विवाह के पंजीकरण को सुगम बनाने के लिए यह नियमावली लागू की जा रही है। यह व्यवस्था आनंद मैरिज एक्ट, 1909 (संशोधित 2012) की धारा-6 के तहत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों के आधार पर बनाई गई है। साथ ही यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य में 4 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
पीएम आवास योजना-शहरी 2.0 के लिए नई नीति को योगी कैबिनेट की मंजूरी
प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत किफायती आवास (एएचपी) और किफायती किराया आवास (एआरएच) घटकों के क्रियान्वयन के लिए नई नीति जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए इन दोनों घटकों के संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। योजना के तहत मध्यम और दुर्बल आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती दरों पर आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 को योगी कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट बैठक में विकास प्राधिकरणों, आवास एवं विकास परिषद तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों के डिफॉल्टरों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) 2026 लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना का उद्देश्य लंबे समय से बकाया धनराशि की वसूली करना और डिफॉल्टर आवंटियों को राहत देना है। वित्त मंत्री खन्ना ने बताया कि विकास प्राधिकरणों और संबंधित संस्थाओं में संपत्तियों से जुड़े कुल 18,982 डिफॉल्टर प्रकरण हैं, जिनमें करीब 11,848.21 करोड़ रुपये की धनराशि बकाया है। इसी तरह मानचित्र स्वीकृति से जुड़े 545 डिफॉल्टर मामलों में लगभग 1,482.10 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इन बकाया रकम की वसूली के लिए ओटीएस योजना लाई जा रही है।
योजना के तहत सभी प्रकार की संपत्तियों (आवासीय, व्यावसायिक तथा अन्य आवंटित संपत्तियों) पर यह योजना लागू होगी। इसमें नीलामी या आवंटन पद्धति से दी गई संपत्तियां भी शामिल होंगी। साथ ही सरकारी संस्थानों, स्कूलों, चैरिटेबल संस्थाओं और अन्य संगठनों को आवंटित संपत्तियों पर भी यह योजना लागू होगी। मानचित्र स्वीकृति से जुड़े डिफॉल्टर मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है।
कानपुर में गंगा नदी पर नए सेतु निर्माण को योगी कैबिनेट की मंजूरी
बैठक में जनपद कानपुर में ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर नया सेतु बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह कार्य अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत कराया जाएगा। इस परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग 753.13 करोड़ रुपये है। इसमें से 460 करोड़ की धनराशि अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत दी जाएगी, जबकि शेष राशि संबंधित प्राधिकरण अपने संसाधनों से खर्च करेगा। इस परियोजना से कानपुर क्षेत्र में औद्योगिक विकास और यातायात व्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप शुक्ला
