


गोरखपुर, 21 मार्च (हि.स.)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान संकाय की तरफ से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “एएमआर-शील्ड 2026” का शनिवार को समापन हो गया। समापन सत्र में मुख्य अतिथि भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक एवं यूपी के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि एएमआर नियंत्रण के लिए बहुक्षेत्रीय समन्वय और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।

डॉ. जीएन सिंह ने एएमआर नियंत्रण के लिए ठोस, व्यावहारिक एवं क्रियान्वयन योग्य सिफारिशें प्रस्तुत करते हुए कहा कि समाधान के लिए चिकित्सकों के स्तर पर दवा नियमन एक महत्वपूर्ण पहलू है। विशिष्ट अतिथि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राम कुमार जायसवाल ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस नियंत्रण में चिकित्सा संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रभावी संक्रमण नियंत्रण उपायों पर बल दिया। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने कहा कि एएमआर से निपटने के लिए तर्कसंगत दवा का उपयोग करना होगा। साथ ही इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने और अनुसंधान प्रोत्साहन पर भी जोर देना होगा।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के तीसरे दिन पैनल चर्चा में डॉ. अब्दुल गफूर (कोऑर्डिनेटर, चेन्नई डिक्लेरेशन ऑन एएमआर एवं वरिष्ठ सलाहकार, संक्रामक रोग, अपोलो हॉस्पिटल, चेन्नई) ने सामुदायिक स्तर पर एएमआर सर्विलांस की चुनौतियों को रेखांकित किया। अमेरिका से ऑनलाइन जुड़े डॉ. ब्रैड स्पेलबर्ग (चीफ मेडिकल ऑफिसर, लॉस एंजिल्स जनरल मेडिकल सेंटर) ने “शॉर्टर इज़ बेटर” अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कम अवधि के एंटीबायोटिक उपचार को अधिक प्रभावी बताया। डॉ. अमरेश कुमार सिंह (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी, बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर) ने सामुदायिक एवं अस्पताल-जनित संक्रमणों में प्रतिरोध के अंतर को स्पष्ट करते हुए वर्तमान निगरानी प्रणालियों की तैयारी पर प्रश्न उठाए। डॉ. पवन कुमार सिंह (चीफ साइंटिफिक ऑफिसर, बीवीजी लाइफ साइंस लिमिटेड, पुणे) ने हर्बल एवं आयुर्वेदिक औषधियों को भविष्य के एंटीमाइक्रोबियल विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। डॉ. सुशांत कुमार श्रीवास्तव (प्रोफेसर, फार्मास्युटिकल इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी, आईआईटी-बीएचयू) ने एएमआर नियंत्रण में स्वास्थ्यकर्मियों की जागरूकता एवं सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया।
ऑनलाइन सत्र में डॉ. अजय सचान (उप औषधि नियंत्रक, भारत, सी.डी.एस.सी.ओ.) ने एएमआर शमन रणनीतियों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. वी. कलाईसेलवन (सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक, इंडियन फार्माकोपिया कमीशन) ने ‘नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया’ की भूमिका को तर्कसंगत दवा उपयोग में अहम बताया। डॉ. सुधांशु सिंह (निदेशक, आई.आर.आर.आई. दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र) ने पौध तथा मिट्टी स्वास्थ्य और एएमआर के संबंधों को रेखांकित किया, जबकि डॉ. संजय माहेश्वरी (मेडिकल डायरेक्टर, एम.पी. बिड़ला ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स) ने एकीकृत महामारी विज्ञान निगरानी प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर ओरल प्रेजेंटेशन में प्रथम स्थान डॉ. कुमारी ऋचा (मेदांता अस्पताल, लखनऊ), द्वितीय स्थान पूजा यादव (एमजीयूजी) एवं तृतीय स्थान अंजलि राय (एमजीयूजी) को प्राप्त हुआ, जबकि पोस्टर प्रेजेंटेशन में अपूर्वा भारद्वाज (डीडीयू गोरखपुर) ने प्रथम, शिवम पांडेय एवं सौम्या पांडेय (एमजीयूजी) ने क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान हासिल किया। प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार सिंह (डीन, स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान संकाय, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर) के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में आभार ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. रश्मि शाही, डॉ. प्रेरणा अदिति व संचालन डॉ. अनुकृति राज ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय
