-अटैकर वर्सेज डिफेंडर थीम पर विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण दृष्टिकोण

पूर्वी चंपारण,09 फ़रवरी (हि.स.)। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सोमवार को ‘एआई इन साइबर सिक्योरिटी: अटैकर वर्सेज डिफेंडर’ विषय पर एक प्रभावशाली वेबिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आगामी ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ एवं ‘राष्ट्रीय एआई मिशन’ के अंतर्गत एक पूर्व-शिखर सम्मेलन गतिविधि के रूप में संपन्न हुआ।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने इस दूरदर्शी पहल के लिए विभाग को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे अकादमिक प्रयास ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए एआई और साइबर सुरक्षा के समन्वय को समझने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। वेबिनार के मुख्य वक्ता डॉ. हरप्रीत सिंह चावला (आईएफटीएम विश्वविद्यालय) ने एआई की द्वैत भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ओर साइबर हमलों को अधिक परिष्कृत बना रही है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा प्रणालियों को भी पहले से कहीं अधिक सशक्त और बुद्धिमान बना रही है। कार्यक्रम का आयोजन डीन प्रो. रणजीत कुमार चौधरी एवं विभागाध्यक्ष प्रो. विकास पारीक के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें कुल 101 विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।
अपने संबोधन में प्रो. पारीक ने तकनीकी कौशल विकास, नवाचार तथा साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में निरंतर सीखने की आवश्यकता को रेखांकित किया। वेबिनार का सफल समन्वय प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला, डॉ. सुनील कुमार एवं डॉ. शुभम कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. शुभम कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन, मुख्य वक्ता एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
वेबिनार विद्यार्थियों के लिए उभरती तकनीकों की समझ को सुदृढ़ करने और साइबर सुरक्षा की चुनौतियों के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / आनंद कुमार
