कोलकाता, 11 मार्च (हि.स.)। रसोई गैस (एलपीजी) की कमी का असर अब सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। राज्य के कई इलाकों से ऑटो रिक्शा का किराया बढ़ाने की खबरें सामने आई हैं। आरोप है कि बिना सरकारी अनुमति के कई रूटों पर मनमाने तरीके से किराया बढ़ाया गया है।

यात्रियों के अनुसार गड़िया–बारुईपुर, सोनारपुर–गड़िया, बारुईपुर–जुलपिया और बारुईपुर–दक्षिण बरासात सहित कई रूटों पर किराया पांच से 10 रुपये या उससे अधिक तक बढ़ा दिया गया है। अचानक किराया बढ़ने से दैनिक यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
यात्रियों का कहना है कि पहले जहां 15 से 17 रुपये किराया देना पड़ता था, वहीं अब 25 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। विरोध करने पर चालकों का कहना है कि ईंधन की कीमत बढ़ने के कारण किराया बढ़ाना मजबूरी है।
दूसरी ओर कई ऑटो चालकों ने भी माना है कि वे अतिरिक्त किराया ले रहे हैं। उनका कहना है कि हाल के दिनों में गैस की कीमत में वृद्धि हुई है और पेट्रोल पंपों पर भी पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में उन्हें अधिक कीमत देकर ईंधन खरीदना पड़ रहा है, जिसकी भरपाई के लिए किराया बढ़ाना पड़ रहा है।
ऑटो चालकों का दावा है कि पहले गैस 70 से 75 रुपये प्रति लीटर मिलती थी, जबकि अब 120 से 150 रुपये प्रति लीटर तक चुकाने पड़ रहे हैं। इसके कारण कई रूटों पर ऑटो की संख्या भी कम हो गई है।
ऑटो यूनियन के नेताओं का कहना है कि वे मनमाने तरीके से किराया बढ़ाने का समर्थन नहीं करते, लेकिन बढ़ती लागत के कारण स्थिति जटिल हो गई है।
इस बीच ऑटो की संख्या कम होने से यात्रियों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं कई चालकों ने गैस की कमी के कारण अस्थायी रूप से ऑटो चलाना भी बंद कर दिया है, जिससे परिवहन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
