कानपुर, 27 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कानपुर में 16 फरवरी को दिनदहाड़े आठ लाख रुपये की लूट की घटना कमिश्नरेट पुलिस के लिए पहेली बन गई थी। सीसीटीवी कैमरे में लूट की घटना कैद होने के बावजूद पीड़ित लूट की घटना को नकारता रहा। पुलिस ने तंत्र का प्रयोग करते हुए जांच शुरु की तो चौकाने वाला मामला सामने आया। पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने शुक्रवार को बताया कि लूटकांड का पीड़ित मोहम्मद वासिद मुख्य सरगना महफूज के लिए काम करता है। महफूज व उसके करीबियों के कानपुर में ही 12 बैंकों में 68 खातें हैं। इन खातों से करीब दो वर्ष में करीब 1600 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई है। इससे साफ हो गया है कि यह संगठित वित्तीय अपराध गिरोह है, जो हवाला कारोबार चलाते हैं। मामले को लेकर ईडी एवं सीबीआई को जांच के लिए पत्राचार किया जा रहा है।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि मोहम्मद वासिद और उसका साथी अरशद नकद रुपयों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते हैं। बीती 16 फरवरी को भी दोनों रुपये लेकर कहीं ठिकाने लगाने जा रहे थे। इसी दौरान श्याम नगर के पास बाइक सवार चार बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान दोनों के सिर पर कट्टे की बट मारकर रुपयों से भरा बैग छीन लिया। घटना के बाद घायलों ने आठ लाख रुपये लूटने की बात कही लेकिन कुछ देर बाद ही वह लूट के बयान से पलट गए।

घायल वासिद ने पुलिस को बताया कि वह फूलबाग स्थित आईडीबीआई बैंक से आठ लाख रुपये निकाल कर जा रहा था। हालांकि पुलिस ने जब बैंक में जाकर पूछताछ करी तो पता चला कि जाजमऊ निवासी शिवांग टेनरी कारोबारी महफूज के खाते से उसी दिन तीन करोड़ 20 लाख रुपये निकाले गए थे। जब जांच और आगे बढ़ी तो पता चला कि 2023 से 2025 तक आईडीबीआई बैंक के ही करीब 14 खातों से 850 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। सभी खाते जाजमऊ स्थित शिवांग टेनरी के पास मिले हैं।
पुलिस जांच में यह भी तथ्य सामने आया कि ईमेल आईडी, पैन नंबर आईडी से पता चला कि महफूज और उसके करीबियों के करीब 12 बैंकों में कुल 68 खातें हैं। जिनसे तकरीबन ढाई साल में 1600 करोड़ रुपये नकद निकाले गए हैं। यह रकम कहां भेजी जा रही थी? इसका इस्तेमाल कहां किया जा रहा था? यह पैसा ब्लैक मनी था? या हवाला का इन सभी सवालों के जवाब पाने के लिए पुलिस अब जीएसटी, इनकम टैक्स और ईडी समेत एजेंसियों को पत्र लिख रही है।
आगे उन्होंने बताया कि इन खातों में कानपुर उन्नाव और फतेहपुर स्थित अलग-अलग इंटरप्राइजेजों से रकमें आती थीं। महफूज ने जीएसटी से छूट पाने के लिए एपीएमसी सर्टिफिकेट ले रखा था। जिसमें यह मेंशन किया गया था कि उनकी फर्म एग्रीकल्चर क्षेत्र में काम करती है। रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक 10 लाख से अधिक की नकदी निकालने पर एसटीआर रिपोर्ट जनरेट करनी पड़ती है लेकिन इस मामले में कहीं पर भी यह नियम लागू होते देखने को नहीं मिला।
वहीं पुलिस ने लूट करने वाले अब्दुल रहमान, सुभान खान, लारेब सिद्दीकी, मोहम्मद जीशान को गिरफ्तार कर लिया है जबकि यासीन और मुजाहिद नाम के दो आरोपितों के साथ गुरुवार देर रात पुलिस की मुठभेड़ हुई थी जिसमें दोनों के पैर में गोली लगी है।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि घटना को अंजाम देने के लिए पिछले एक महीने से रेकी और लूट का अभ्यास किया जा रहा था। इस पूरे लूट कांड में रहमान मास्टरमाइंड था। रहमान का दोस्त अरुण सोनी महफूज का कैश कैरी करता था। इसके बाद अरुण से रहमान ने सारी जानकारी ली। घटना के दिन महफूज ने बैंक से कैश निकालकर अपने कैरियर को दे दिया। झकरकटी पहुंचते ही रुपयों का बंटवारा किया गया। वहीं से वासिद और अरशद 24 लाख रुपये लेकर उसे ठिकाने लगाने के लिए निकले थे। यहीं से बदमाशों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया था और श्यामनगर पहुंचते ही उनके साथ लूट की घटना को अंजाम दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित रकम के हिस्सों को आपस में बांटकर राजधानी दिल्ली और फिर जम्मू कश्मीर होते हुए नेपाल घूमने चले गए थे। लुटेरों के पास से पुलिस ने करीब 11 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
वहीं पुलिस की इस कार्रवाई के बाद महफूज मौके से फरार हो गया है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि अब तक पूछताछ में महफूज ने कोई सहयोग नहीं किया है। वह खुद पीड़ित पर रिपोर्ट न लिखवाने का दबाव बना रहा था। घटना के बाद से महफूज ने एक करोड रुपये अपने खाते से निकाले हैं। वहीं इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पुलिस टीम को एक लाख पुरस्कार के रूप में नकद राशि दी गई है।
उन्होंने बताया कि महफूज व उसके सहयोगियों के जिन बैंकाें में खाते मिले हैं उनमें आईडीबीआई, एचडीएफसी, आरबीएल, इंडसइंड बैंक, बैंक ऑफ़ बड़ौदा, कोटक महिंद्रा, यूनियन बैंक, एक्सिस बैंक, बंधन बैंक, बैंक ऑफ़ इंडिया, आइसीआइसीआइ बैंक शामिल है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
