पूर्व मेदिनीपुर, 16 मार्च (हि. स.)। जिले के कोलाघाट क्षेत्र में रूपनारायण नदी में किए गए ड्रेजिंग कार्य का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह स्थानीय मछुआरों से मिली जानकारी के अनुसार, बरसात से पहले ही नदी में हिलसा मछलियों के झुंड मिलने लगे हैं, जिससे स्थानीय मछुआरों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

स्थानीय मछुआरों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से नदी की गहराई बढ़ाने के लिए ड्रेजिंग का काम चल रहा है। इसका सीधा असर यह हुआ कि समुद्र से हिलसा के झुंड फिर से नदी में प्रवेश करने लगे हैं।
स्थानीय मछुआरों के अनुसार, एक नाव में प्रतिदिन औसतन आठ से दस किलो हिलसा पकड़ी जा रही है। बाजार में इसकी कीमत 1400 से 1600 रुपये प्रति किलो तक है।
स्थानीय वरिष्ठ मछुवार अनादि मुदी ने कहा कि नदी में गाद जमा होने और प्रदूषण के कारण पिछले कई वर्षों से रूपनारायण में हिलसा लगभग गायब हो गई थी। इससे कई मछुआरों को मजबूरी में दूसरे कामों की ओर रुख करना पड़ा था।
मछली व्यवसायी अनूप नाथ ने बताया कि उनकी नाव में हाल के दिनों में 10 से 15 किलो हिलसा पकड़ी जा रही है, और एक मछली का वजन लगभग एक से 1.2 किलो है।
पूर्व मत्स्य अधिकारी सुरजीत बाग के अनुसार, रूपनारायण नदी में जू-प्लैंकटन और फाइटो-प्लैंकटन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं, जो हिलसा का पसंदीदा भोजन है। ड्रेजिंग के बाद नदी की गहराई बढ़ने से हिलसा के झुंड के लिए अनुकूल वातावरण बन गया है।
स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि अगर नदी की सफाई और ड्रेजिंग का काम इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले समय में कोलाघाट की हिलसा की पुरानी ख्याति फिर से लौट सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
