रांची, 10 मार्च (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को श्रम, नियोजन, कौशल विकास एवं उद्योग विभाग की अनुदान मांगों पर कटौती प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस दौरान विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद झारखंड के सामने कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि खान-खनिज के मामले में झारखंड देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि कोयला उत्पादन के मामले में राज्य पूरे देश में अग्रणी है। ऐसे में झारखंड में विकास की संभावनाएं काफी हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। राज्य की प्राकृतिक संपदा और संसाधनों का सही उपयोग करते हुए रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
प्रदीप यादव ने कहा कि इतनी प्राकृतिक संपदा होने के बावजूद राज्य में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। झारखंड की खनिज संपदा और अन्य संसाधनों का समुचित उपयोग कर नए उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने कहा कि देश जिस आर्थिक और रोजगार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है, उससे झारखंड भी अछूता नहीं है। इन चुनौतियों के बीच सरकार को बेहतर प्रयास करते हुए राज्य में नए उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे समस्याओं का समाधान संभव हो सके।
विधायक ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि एचईसी जैसे सार्वजनिक उपक्रम लगातार कमजोर होते जा रहे हैं और वहां कार्यरत कर्मचारियों को समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बेरोजगारी की समस्या को दूर करना और कठिन हो जाएगा।
प्रदीप यादव ने कहा कि जब तक भारत सरकार की नीतियों और दिशा में बदलाव नहीं होगा तथा औद्योगिक रोजगार को बढ़ावा देने वाली नीतियां नहीं बनेंगी, तब तक देश और राज्यों में बेरोजगारी की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं हो पाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar
