मुंबई, 30जनवरी ( हि.स.) । साधारणतः समतोल फाउंडेशन के काम के बारे में तो जानते ही हैं, कि यह एक राष्ट्रीय संस्था है जो रेलवे स्टेशनों पर मुसीबत में फंसे बच्चों को उनके परिवारों में वापस बसाती है। इसमें नए और पुराने, सभी बच्चों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन बच्चों की उम्र 8 से 16 साल के बीच होती है। 16 साल से ज़्यादा उम्र के बच्चों के लिए एक खास प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसमें गो संरक्षण केंद्र, ऑर्गेनिक खेती, आयुर्वेदिक औषधीय पौधों की ट्रेनिंग दी जाती है। मुख्य विषय बच्चों को छोटी-छोटी बातें समझाकर उन्हें मजबूत बनाना है।समतोल फाउंडेशन गो रक्षा और गो वंश सेवा केंद्र पिछले 10 सालों से चला रहा है। हम कई जगहों पर गो विज्ञान गोबर गोमूत्र से बने उत्पाद देखते हैं, लेकिन समाज अभी भी इसे नज़रअंदाज़ कर रहा है। ग्रामीण महिलाओं के सेल्फ-हेल्प ग्रुप, छोटे बच्चे विकास के लिए कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अच्छी ट्रेनिंग और प्लेटफॉर्म नहीं मिल पा रहा है जो भविष्य की दिशा बदल सके। लोगों में उतनी जागरूकता नहीं है, इसलिए रोज़गार हाथ में होने के बावजूद बेरोज़गारी बढ़ रही है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कुछ डिपार्टमेंट ट्रेनिंग देते हैं, लेकिन यह ट्रेनिंग शहर में होती है। गांव की महिलाओं को स्टूडेंट्स तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, कुछ फीस देनी पड़ती है और फिर यह ट्रेनिंग नहीं हो पाती है।समतोल फाउंडेशन हमेशा एक नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है। महाराष्ट्र राज्य गौ सेवा आयोग और एमगिरी के साथ बातचीत में, हमने 28 जनवरी 2026 को मामनोली कल्याण में स्वामी विवेकानंद परिवर्तन केंद्र में ट्रेनिंग और डेमोंस्ट्रेशन करके एक बैलेंस बनाने की कोशिश की है। एमएसएमई भारत सरकार के डॉ. जयकिशोर छंगानी, डॉ. बनकर, डॉ. शीतल शर्मा प्रोग्राम में मौजूद थे और उन्हें संचालित किया। महाराष्ट्र राज्य गौ सेवा आयोग के सदस्य उद्धवजी नेरकर ने इस बारे में अच्छी जानकारी दी कि कैसे गौ विज्ञान पर आधारित गाय हमारी ज़िंदगी को बेहतर बना सकती है। प्रशिक्षण में कुल 230 लोग शामिल हुए, जिनमें शाहपुर, मुरबाद, पालघर, कल्याण, टिटवाला, बदलापुर के गौ सेवक, गौशाला संचालक, महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप, घरेलू महिलाएं, एनएसएस के युवा, युवा ग्रुप, विकसित किसान, गौशिक टेक्नोलॉजी स्किल डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट के छात्र, सभी मौजूद थे। खासकर एमगिरी वर्धा से आए युवाओं, महिलाओं और गौशाला संचालकों ने, जिन्हें गाय के प्रोडक्ट बनाने और बेचने की ट्रेनिंग दी गई है, स्टॉल लगाए और कई प्रोडक्ट के बारे में जानकारी दी।समतोल फाउंडेशन के प्रेसिडेंट और ठाणे विधायक संजय केलकर ने दोपहर के सत्र में हिस्सा लिया और उत्साह बढ़ाया।आम बोली में एक कहावत है, गाय के घर में भगवान के पैर होते हैं। गुजरात और राजस्थान राज्यों में बहुत ज़्यादा मात्रा में गाय का गोबर और मूत्र से उत्पाद बनते है और यह सुरक्षित और भरोसेमंद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा
