जयपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने विधानसभा में कहा है कि निराश्रित गाेवंश के लिए राज्य में 4 हजार से अधिक गाेशालाएं संचालित हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुदान के लिए पात्र 3 हजार 310 गाेशालाओं से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

कुमावत ने कहा कि कई स्थानों पर गाेचर भूमि में गौशालाएं संचालित हैं लेकिन एक रिट प्रकरण के कारण भूमि उनके नाम पर आवंटित नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग के एक नए परिपत्र के अनुसार जिस भी ग्राम पंचायत में सिवायचक भूमि नहीं है लेकिन गौवंश के लिए पर्याप्त गौचर है, वहां गौशालाओं के लिए भूमि आवंटित हो सकती है। उन्होंने सदन में बताया कि ऐसे प्रकरणों में जिला कलेक्टर के माध्यम से नियमानुसार भूमि आवंटन करवाया जा सकता है।

गोपालन मंत्री ने विधायक बहादुर सिंह के पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि ग्राम पंचायतों में चारागाह भूमि पंचायती राज विभाग के अंतर्गत आती है। यदि उस पर अतिक्रमण है तो शीघ्र हटाया जाना चाहिए। उन्होंने पंचायती राज मंत्री से आग्रह किया कि ऐसे प्रकरणों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाए। कुमावत ने कहा कि प्रदेश में नई गाेशालाएं और खुलनी चाहिए जिससे निराश्रित गौवंश की उचित देखभाल संभव हो सके।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में ‘पशु आश्रय स्थल योजना‘, ‘पंचायत समिति स्तरीय नंदीशाला जन सहभागिता योजना‘ और ‘गौशाला विकास योजना’ संचालित है। उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि इन योजनाओं के बारे में अधिकाधिक प्रचार-प्रसार करें। नियमानुसार नई गाेशालाएं खोलकर विभाग को प्रस्ताव भेजे जाएं, ताकि उन्हें अनुदान और अन्य सहायता मिल सकें।
इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में गोपालन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का विधानसभा क्षेत्र वैर के उपखंड मुख्यालय वैर में गौशाला खोलने का विचार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में गौशालाओं की स्थापना एवं संचालन स्वयं सेवी संस्था—ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान गाे संरक्षण एवं संवर्धन निधि नियम, 2016 संशोधित 2021 के अंतर्गत पात्र गाेशालाओं में संधारित गोवंश को चारा-पानी एवं पशु आहार हेतु सहायता राशि तथा आधारभूत परिसम्पतियों के निर्माण के लिए अनुदान दिये जाने का प्रावधान है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश
