जोधपुर, 09 मार्च (हि.स.)। महात्मा गांधी अस्पताल के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग में गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) के कैंसर से पीडि़त एक मरीज का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। ऑपरेशन के दौरान कैंसर के लिवर तक फैल जाने के कारण लिवर का लगभग 70-75 प्रतिशत हिस्सा भी निकालना पड़ा। करीब छह घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. फतह सिंह भाटी ने बताया कि बाड़मेर निवासी मरीज भिया राम पित्त की थैली के कैंसर से पीडि़त था। उसने कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन तब तक कैंसर काफी बढ़ चुका था और उसका संक्रमण लिवर तक फैल गया था। साथ ही लिवर के दाहिने हिस्से की रक्त वाहिका भी कैंसर की गांठ से प्रभावित हो गई थी। इसके बाद मरीज ने गैस्ट्रो सर्जन डॉ. दिनेश चौधरी को दिखाया। जांच के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी और बताया कि कैंसर की गांठ के साथ लिवर का लगभग 70-75 प्रतिशत हिस्सा निकालना पड़ेगा।
मरीज का रेडिकल कोलेसिस्टेक्टमी विद एक्सटेंडेड राइट हेमी हेपेटेक्टॉमी ऑपरेशन किया गया। इस प्रक्रिया में पित्त की थैली के कैंसर की गांठ के साथ-साथ लिवर के प्रभावित हिस्से को भी निकालना पड़ता है। यह ऑपरेशन काफी जटिल माना जाता है, क्योंकि इसमें लिवर के हाइलम के पास सूक्ष्म विच्छेदन कर दाएं और बाएं हिस्से की आर्टरी, पोर्टल वेन और बाइल डक्ट को अलग करना पड़ता है तथा बाद में लिवर को लगभग मध्य से काटना पड़ता है, जिसमें अधिक रक्तस्राव का खतरा रहता है।
डॉ. दिनेश चौधरी ने बताया कि यदि ऑपरेशन के बाद बचा हुआ लिवर स्वस्थ होता है तो वह धीरे-धीरे बढक़र सामान्य आकार के करीब पहुंच जाता है। हालांकि ऑपरेशन के बाद की देखभाल भी काफी चुनौतीपूर्ण रहती है, क्योंकि यदि बचा हुआ हिस्सा पर्याप्त नहीं होता तो लिवर फेल होने का खतरा रहता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश
