खूंटी, 26 मार्च (हि.स.)। कर्रा प्रखंड के घासीबारी गांव में ग्राम कोष समिति के गठन को लेकर विवाद गहरा गया है। गुरुवार को गांव के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान की ओर से समिति गठन में सभी समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं किए जाने पर कड़ा विरोध जताया। इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने बैठक आयोजित कर ग्राम प्रधान के एकतरफा रवैये के खिलाफ आवाज उठाई और बीडीओ, जिला पंचायती राज पदाधिकारी और उपायुक्त को लिखित ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया।

बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि घासीबारी गांव की आबादी में लगभग 80 प्रतिशत ओबीसी और 20 प्रतिशत एसटी समुदाय के लोग निवास करते हैं। इसके बावजूद ग्राम प्रधान हीरामन बारला द्वारा केवल एसटी समुदाय के लोगों को शामिल कर ग्राम कोष समिति का गठन कर दिया गया, जिसे ग्रामीणों ने गलत और पक्षपातपूर्ण बताया। उन्होंने मांग किया कि समिति का पुनर्गठन किया जाए, जिसमें ओबीसी और एसटी दोनों समुदायों की समान भागीदारी सुनिश्चित हो।
बैठक में उपस्थित घुनसूली पंचायत की मुखिया बंधना उरांव ने ग्रामीणों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सभी समुदायों की सहभागिता के बिना कोई भी समिति अधूरी मानी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की मांग को ध्यान में रखते हुए घासीबारी गांव में पुनः ग्राम कोष समिति का गठन कराया जाएगा, जिसमें दोनों समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
इस संबंध में ग्राम प्रधान हीरामन बारला ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि विभाग की ओर से 28 मार्च तक ग्राम कोष समिति का गठन कर सूची जमा करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने कहा कि दोनों टोलों के लोगों को साथ लाकर ग्राम सभा कराने का प्रयास किया गया, लेकिन संयुक्त बैठक संभव नहीं हो सकी। ऐसी स्थिति में अलग-अलग टोलों में बैठक कर समिति का गठन किया गया, जिसे दूसरे पक्ष के ग्रामीण स्वीकार नहीं कर रहे हैं। ग्राम प्रधान ने आगे कहा कि विवाद को सुलझाने के लिए 28 मार्च तक दोनों टोलों के लोगों की संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी और सर्वसम्मति से ग्राम कोष समिति का पुनर्गठन किया जाएगा।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा
