झाड़ग्राम, 10 मार्च (हि.स.)। जंगमहल क्षेत्र में रहने वाले कुर्मी समुदाय की मातृभाषा कुड़माली को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। विद्यासागर विश्वविद्यालय ने झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर जिले के 18 कॉलेजों में स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर पर कुड़माली भाषा में पढ़ाई शुरू करने की पहल की है।

विश्वविद्यालय के कॉलेज इंस्पेक्टर अभिजीत रायचौधुरी ने पांच मार्च को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत 2026–27 शैक्षणिक सत्र से बेलदा कॉलेज, चंद्रकोणा विद्यासागर महाविद्यालय, गड़बेता कॉलेज, गोपीबल्लभपुर-दो सरकारी जनरल डिग्री कॉलेज, लालगढ़ सरकारी जनरल डिग्री कॉलेज, शालबनी सरकारी जनरल डिग्री कॉलेज, झाड़ग्राम राज कॉलेज, रानी इंद्रादेवी गर्ल्स कॉलेज, सेवा भारती महाविद्यालय और सुबर्णरेखा महाविद्यालय सहित कुल 18 कॉलेजों में कुड़माली भाषा में पढ़ाई शुरू करने की तैयारी करने को कहा गया है।
मंगलवार सुबह इसकी पुष्टि करते हुए झाड़ग्राम राज कॉलेज के प्राचार्य देवनारायण राय ने कहा कि कुड़माली भाषा में पठन-पाठन शुरू करने के लिए किन-किन व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी, इसका आकलन कर उच्च शिक्षा विभाग को अवगत कराया जाएगा।
दरअसल, 25 फरवरी को जंगलमहल स्वराज मोर्चा ने ई-मेल के माध्यम से विद्यासागर विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर कुड़माली भाषा में पढ़ाई शुरू करने की मांग की थी।
मोर्चा के केंद्रीय समिति के अध्यक्ष अशोक महतो का कहना है कि जंगलमहल के कुर्मी समुदाय के लोग अपनी मातृभाषा कुड़माली में ही अधिक सहज महसूस करते हैं। ऐसे में इस भाषा के विकास, परंपरा और इतिहास को संरक्षित करने के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस कदम के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इससे कुड़माली भाषा के अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
वर्तमान में पुरुलिया स्थित सिधु कान्हू बिरसा विश्वविद्यालय और झाड़ग्राम के साधु रामचांद मुर्मू विश्वविद्यालय में कुड़माली भाषा में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई होती है। साधु रामचांद मुर्मू विश्वविद्यालय में कुड़माली भाषा व संस्कृति तथा झूमर गीत-नृत्य में एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं।
हालांकि, कुड़माली भाषा में पीएचडी की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2025 में कुड़माली में स्नातकोत्तर करने वाले छात्र राहुल महतो ने कहा कि विश्वविद्यालय का यह कदम सराहनीय है, लेकिन भविष्य में पीएचडी स्तर की पढ़ाई भी शुरू की जानी चाहिए, ताकि शोध के अवसर मिल सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
