प्रयागराज, 13 मार्च (हि.स.)। लोक अदालत की अवधारणा पूर्व राज्यसभा सांसद शिव दयाल चौरसिया के ही प्रयासों और पैरवी का परिणाम है, इसलिए उन्हें लोक अदालत का जनक कहा जाता है। उक्त बातें उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय जार्ज टाउन में आयोजित जयंती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एमएलसी मान सिंह यादव ने कही।

उन्होंने कहा कि स्व. शिवदयाल चौरसिया का जन्म 13 मार्च 1903 को लखनऊ के खरिका गांव (वर्तमान तेलीबाग) में स्व. पराग राम चौरसिया के पुत्र के रूप में हुआ था। वकालत की पढ़ाई के बाद उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं के साथ मिलकर साइमन कमीशन समक्ष पिछड़े वर्गों की दयनीय स्थिति को मजबूती से रखा।
उन्होंने आगे कहा कि स्व. चौरसिया ने भीम राव आंबेडकर के साथ डिप्रेस्ड क्लासेस तथा बाद में डिप्रेस्ड लीग में भी काम किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ा था। बाद में कांग्रेस ने वर्ष 1974 में उन्हें राज्यसभा भेजा, जहां उन्होंने उद्योगपति के.के. बिड़ला को पराजित किया था। समाजवादी पार्टी के प्रयागराज के जार्जटाउन स्थित सपा कार्यालय में शुक्रवार को लोक अदालत के जनक पूर्व राज्यसभा सांसद शिव दयाल चौरसिया की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन तथा योगदान पर चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अनिल यादव ने की, जबकि संचालन महानगर अध्यक्ष सैयद इफ्तेखार हुसैन ने किया। आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने स्व. चौरसिया के जीवन वृत्त और सामाजिक न्याय के लिए उनके संघर्ष को याद किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल
