सुपौल, 22 फ़रवरी (हि.स.)। जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड क्षेत्र के हरिहरपट्टी पंचायत अंतर्गत कुसहा वार्ड संख्या-12 स्थित पशु स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार है। 80 के दशक में एनआरईपी योजना के तहत निर्मित यह भवन आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में खड़ा है और पशु चिकित्सा सेवा के बजाय पशुचारा व पुआल रखने के काम आ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1981 में एक पूर्व मुखिया के कार्यकाल में इस भवन का निर्माण कराया गया था। शुरुआती दो वर्षों तक यहां डॉक्टर नियमित रूप से आते थे और एक कम्पाउंडर भी गांव में किराए के मकान में रहकर सेवा देता था। उस समय आसपास के गांवों के पशुपालक अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए इसी केंद्र पर निर्भर रहते थे।वर्तमान स्थिति यह है कि केंद्र पर न तो डॉक्टर आते हैं और न ही कोई कर्मचारी तैनात है। भवन के आसपास जंगली झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और कमरों में विषैले जीव-जंतुओं का डेरा है।

ग्रामीणों ने बताया कि मजबूरी में वे भवन का उपयोग पशुओं का चारा, पुआल और पाट की संठी रखने के लिए कर रहे हैं।
इलाज के अभाव में पशुपालकों को करीब 15 किलोमीटर दूर अनुमंडलीय पशु अस्पताल त्रिवेणीगंज या पड़ोसी प्रखंड छातापुर एवं प्रतापगंज के केंद्रों पर जाना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक दोनों प्रकार की परेशानी उठानी पड़ती है।
पूर्व मुखिया राज किशोर यादव ने बताया कि पंचायत समिति की बैठक में भी कई बार इस मुद्दे को उठाया गया है और जिला पशु चिकित्सा विभाग से केंद्र को पुनः चालू करने का आग्रह किया गया, लेकिन स्टाफ की कमी का हवाला देकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।
ग्रामीण कमलनाथ यादव सहित अन्य लोगों का कहना है कि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाओं के अभाव में ये योजनाएं प्रभावी नहीं हो पा रही हैं। उनका आरोप है कि पशु स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली सरकारी दावों की पोल खोल रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि भवन का नए सिरे से निर्माण कर डॉक्टर और कम्पाउंडर की स्थायी नियुक्ति की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही केंद्र को पुनः चालू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इसके लिए ग्रामीणों ने तैयारी भी शुरू कर दी है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र
