जगदलपुर, 25 जनवरी (हि.स.)। वित्त विभाग के परीक्षण में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के बीच पेंशन बंटवारे में मध्यप्रदेश सरकार से छत्तीसगढ़ सरकार को 10 हजार करोड़ की लेनदारी निकली है। इस पर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने कहा है कि दोनों राज्यों के जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही का खामियाजा 25 सालों से पेंशनर्स को भुगतना पड़ा है। इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पेंशनर्स ने की है।

पेंशनर्स महासंघ के बस्तर संभागीय अध्यक्ष रामनारायण ताटी ने रविवार काे कहा कि मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 (6) के प्रावधानों के तहत दोनों राज्यों के बीच पेंशन बजट 74 अनुपात 26 के मान से तय किया गया था। इसके तहत पेंशनरों की महंगाई राहत में बढ़ोतरी होने पर 74 प्रतिशत मध्यप्रदेश और 26 प्रतिशत छत्तीसगढ़ सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि यह चूक इसलिए हुई, क्योंकि तय मापदंडों के तहत छत्तीसगढ़ सरकार अपने हिस्से की 26 फीसदी राशि बराबर देती रही, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार से 74 फीसदी राशि ली ही नहीं गई। यही राशि बढ़कर अब 10 हजार करोड़ तक पहुंच गई, जिसका सीधा असर छत्तीसगढ़ के सरकारी खजाने पर पड़ा है। दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति बराबर होती थी, लेकिन वित्तीय आदान-प्रदान समय पर नहीं हुआ। इस मामले पर संघ ने लगातार सरकार से इसकी जांच करने की मांग की।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे
