प्रयागराज, 18 मार्च (हि.स)। जैव उर्वरक सतत् व टिकाऊ कृषि के लिए एक प्रमुख घटक हैं जो मिट्टी की उर्वरता व फसल की उत्पादकता को रासायनिक उर्वरकों के बिना बढ़ाते हैं। यह बातें ईश्वर शरण डिग्री काॅलेज प्रयागराज में वनस्पति विज्ञान विभाग व आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में एस. एस. खन्ना गर्ल्स पीजी काॅलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ऋचा टंडन ने कही।

बुधवार को आयोजित व्याख्यान में बतौर मुख्य अतिथि ने कहा कि जैव उर्वरक सूक्ष्म जीवों जैसे कवक, बैक्टीरिया, शैवाल आदि से बने होते हैं। बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने में जैव उर्वरकों का महत्वपूर्ण स्थान है। ये लगभग 20-30 प्रतिशत तक की उत्पादकता को बढ़ाते हैं व पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। भारत में जैविक खेती से अच्छा व्यवसाय शुरू हो गया है। इसके उपयोग से 150 प्रतिशत तक का रिर्टन मिल सकता है। इसमें उपयोग होने वाले कवक, शैवाल आदि की विस्तृत जानकारी होनी चाहिए।
महाविद्यालय के पीआरओ डॉ. मनोज कुमार दुबे ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता कॅालेज के प्राचार्य प्रो. आनन्द शंकर सिंह ने व स्वागत वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. सरोज पाण्डेय तथा संचालन सोनाली शुक्ला ने किया। इस अवसर पर आईक्यूएसी की संयोजक प्रो. अनुजा सलूजा, विभागाध्यक्ष डॉ. जया त्रिपाठी, डॉ. राजेश वर्मा, अनु सरोज, डॉ. संजीव कुमार आदि मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र
