रांची, 18 मार्च (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन बुधवार को विधानसभा परिसर ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंज उठा। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) के विधायकों ने विधानसभा गेट के बाहर भगवान श्रीराम की तस्वीर के साथ नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया।

विपक्षी विधायकों ने हजारीबाग जिले में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ तख्ती-बैनर लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने राज्य सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन कर रहे भाजपा और आजसू विधायकों का कहना था कि हजारीबाग के बड़कागांव के महूदी क्षेत्र में रामनवमी जुलूस में डीजे बजाने पर रोक लगाई गई है, जो अनुचित है। उनका आरोप था कि यह निर्णय एक विशेष समुदाय को खुश करने के लिए लिया गया है। हजारीबाग के भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद ने इस आदेश को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि क्षेत्र की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रामनवमी जैसे धार्मिक पर्व पर इस तरह के प्रतिबंध दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस महूदी क्षेत्र को संवेदनशील बताया जा रहा है, वह अब तक संवेदनशील क्यों बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन ऐसे प्रतिबंध लगाकर स्थिति को और जटिल बना रहा है।
वहीं, इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि कुछ विधायक माहौल बिगाड़ने और लोगों को उकसाने का प्रयास कर रहे हैं, जिन पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामनवमी मनाने पर कोई रोक नहीं है, केवल डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न्यायालय के निर्देशों और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
मंत्री ने यह भी टिप्पणी की कि कई विधायक पहली बार चुने गए हैं और उन्हें नियमों की जानकारी कम है। ऐसे में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से नए विधायकों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था कराने का आग्रह करने की बात कही।
इस मुद्दे को लेकर सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल गरमाया रहा और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली।—————-
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे
