कांचीपुरम, 28 मार्च (हि.स.)। कांचीपुरम विधानसभा सीट इस बार तमिलनाडु की सबसे चर्चित सीटों में से एक बनती जा रही है। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह क्षेत्र अब नए सियासी समीकरणों के चलते दिलचस्प मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। पारंपरिक दलों के साथ-साथ नई राजनीतिक ताकतों की एंट्री ने चुनाव को और रोमांचक बना दिया है।

तमिलनाडु के उत्तर-पूर्व में वेगवती नदी के किनारे बसा यह प्राचीन शहर कभी पल्लव और चोल राजवंशों की राजधानी रहा है। यहां स्थित कामाक्षी अम्मन मंदिर, एकाम्बरेश्वर मंदिर और वरदराज पेरुमल मंदिर देशभर में प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा कांचीपुरम अपनी विश्वप्रसिद्ध रेशमी साड़ियों के लिए भी जाना जाता है, जिन्हें 2006 में भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा मिला था।
चुनावी इतिहास
तमिलनाडु के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले कांचीपुरम विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद रोचक होने की संभावना है। मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध कांचीपुरम न केवल सांस्कृतिक पहचान रखता है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी यह एक अहम सीट मानी जाती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के उम्मीदवार एझिलरासन ने 1,02,712 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। दूसरे स्थान पर पट्टाली मक्कल काची के महेश कुमार रहे, जिन्हें 91,117 वोट मिले। तीसरे स्थान पर नाम तमिझर काची और चौथे स्थान पर मक्कल नीधी मय्यम रही।
वर्ष 1977 के बाद से अब तक इस सीट पर अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) ने 6 बार और द्रमुक ने 4 बार जीत हासिल की है। इससे यह सीट परंपरागत रूप से अन्नाद्रमुक के लिए थोड़ी मजबूत मानी जाती रही है, हालांकि हाल के वर्षों में द्रमुक ने अपनी पकड़ मजबूत की है।
प्रमुख स्थानीय मुद्दे
कांचीपुरम की पहचान भले ही सांस्कृतिक हो, लेकिन यहां कई बुनियादी समस्याएं अब भी कायम हैं। गर्मियों में पेयजल की कमी, जल निकासी और सीवरेज की दिक्कतें, तेजी से हो रहे शहरीकरण के बावजूद अधूरी सुविधाएं और बुनकरों के लिए पर्याप्त सरकारी सहायता का अभाव प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
राजनीतिक स्थिति और रणनीति
द्रमुक की स्थिति:
सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के आधार पर समर्थन बनाए रखने की कोशिश कर रही है। महिलाओं, सरकारी कर्मचारियों और शहरी मध्यम वर्ग में पार्टी का आधार मजबूत माना जा रहा है, लेकिन पानी, रोजगार और परिवहन से जुड़े मुद्दे असंतोष भी पैदा कर रहे हैं।
अन्नाद्रमुक की रणनीति:
विपक्षी अन्नाद्रमुक सरकार के खिलाफ असंतोष को भुनाने की कोशिश कर रही है। कानून-व्यवस्था, महंगाई और अधूरे वादे इसके मुख्य चुनावी मुद्दे हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर एकजुटता और गठबंधन की स्थिति उसकी चुनौती बनी हुई है।
भाजपा का बढ़ता प्रभाव:
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस सीट पर अभी मजबूत स्थिति में नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे शहरी युवाओं और मध्यम वर्ग में अपनी पकड़ बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
नई एंट्री – टीवीके:
अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (टीवीके) इस चुनाव में नया फैक्टर बनकर उभरी है। यह पार्टी युवाओं और पहली बार वोट देने वालों को आकर्षित कर सकती है, जिससे वोटों का विभाजन होने की संभावना है।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि चार-कोणीय मुकाबले के चलते कांचीपुरम विधानसभा सीट पर इस बार कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। परंपरागत राजनीतिक समीकरणों, बढ़ते असंतोष और नई पार्टी की एंट्री के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर जीत किसके खाते में जाती है।———-
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV
