पश्चिमी सिंहभूम, 28 मार्च (हि.स.)। चाईबासा में उद्योग विभाग अंतर्गत हस्तकरघा, रेशम एवं हस्तशिल्प निदेशालय तथा सहायक उद्योग निदेशक, रेशम कार्यालय के तत्वावधान में शनिवार को तसर रेशम पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त चंदन कुमार, जिला परिषद अध्यक्षा लक्ष्मी सुरेन और विशिष्ट अतिथि के रूप में उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार शामिल हुए।
कार्यशाला में कच्चा माल बैंक के सहायक सचिव राम मोहन प्रमाणिक, स्वयंसेवी संस्थान ग्राम रचना से ज्योति, सेंट्रल सिल्क बोर्ड के वैज्ञानिक, कच्चा माल बैंक चाईबासा के तकनीकी पदाधिकारी, अग्र परियोजना पदाधिकारी, राज्य एवं केंद्र सरकार के कर्मचारी और करीब 400 तसर रेशम कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के बाद की गई।
इस दौरान तसर कोकून उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किटपालकों को प्रशस्ति पत्र, उपस्कर और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया और बेहतर उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त चंदन कुमार ने रेशम कृषकों से कोकून उत्पादन के साथ मूल्य संवर्धन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष में धागाकरण, बुनाई, रंगाई और छपाई जैसे कार्यों को जिले में शुरू करने के लिए जरूरी पहल की जाएगी। उन्होंने कार्यशाला के मुख्य विषय कोल्हान का अनमोल वरदान-तसर कोकून से है हमारी पहचान पर जोर देते हुए कहा कि तसर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।
जिला परिषद अध्यक्षा लक्ष्मी सुरेन ने भी किसानों को अधिक से अधिक तसर खेती करने के लिए प्रेरित किया। वहीं तकनीकी और शोध पदाधिकारियों ने उपस्थित किसानों को आधुनिक तकनीक और नई जानकारियों से अवगत कराया।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक
