-मनोज कुमार मिश्र

शराब घोटाले की आंच से झुलसी आम आदमी पार्टी (आआपा) को निचली अदालत से मिली राहत स्थाई नहीं दिख रही है। सीबीआई की याचिका पर हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी लोगों को जवाब देने के लिए नोटिस दिया है। दस साल से ज्यादा दिल्ली की सत्ता में रही आआपा पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा से पराजित होकर सत्ता से बाहर हो गई। एक तो चुनाव में आआपा पराजित हुई, दूसरा चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बना-शराब घोटाला। अपने को कट्टर ईमानदार होने का दावा करने वाली आआपा और उसके सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार के आरोप में पराजित हुए। इसके चलते दिल्ली में मुख्य विपक्षी पार्टी होने के बावजूद आआपा हाशिए पर जाती दिखती थी। पंजाब में सरकार होने के बावजूद आआपा नेताओं में पहले वाले तेवर नहीं दिख रहे थे। लेकिन 27 फरवरी को दिल्ली की राउज एवेन्यू विशेष न्यायालय के न्यायाधीश जितेन्द्र सिंह की अदालत ने साफ कहा किया शराब घोटाले के आरोपों को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं दिए गए हैं। अदालत ने सभी आरोपियों को न केवल आरोप मुक्त किया बल्कि सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश दिया।इसे आधार बनाकर केजरीवाल और आआपा ने दिल्ली में हंगामा खड़ा कर हारी हुई बाजी पलटने की कोशिश की। वे सालों बाद वापस जंतर-मंतर गए जहां से उनकी राजनीति शुरू हुई थी। जिन दावों के बल पर आआपा दिल्ली जीती और देशभर में राजनीति कर अखिल भारतीय पार्टी बनी, उसी बुनियाद पर नया महल बनाने की प्रयास करने लगी।
आआपा की राजनीति की यूएसपी (मूल तत्व) ही अपने को कट्टर ईमानदार साबित करने और सरकारी धन से मुफ्त की रेवड़ियां बांटना था। वैसे तो 49 दिन की पहली अल्पमत सरकार के जाने के बाद 2015 में प्रचंड बहुमत की सरकार बनते ही आआपा नेताओं का चाल, चरित्र और चेहरा सामने आने लगा लेकिन प्रचंड बहुमत की दूसरी सरकार में खुलकर भ्रष्टाचार दिखने लगा। शराब घोटाले ने उसे उजागर कर दिया। किसी भी राज्य सरकार का अधिकार है कि वह आबकारी (शराब) नीति बनाए लेकिन खुद बना कर और हड़बड़ी में वापस लेकर इस सरकार ने भ्रष्टाचार के सबूत दे दिए। 17 नवंबर, 2021 को नई शराब नीति लागू की गई। इसके तहत 32 जोन बनाए गए। हर जोन में अधिकतम 27 दुकानें खुलनी थी। पहले 60 फीसदी दुकान सरकारी और 40 फीसदी निजी होती थी। इस बार 3500 करोड़ लाभ होने के नाम पर सभी दुकानें निजी कारोबारी को दी गई। जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने के आरोप लगने पर आनन-फानन में 30 जुलाई, 2022 को नई आबकारी नीति को वापस लेकर पुरानी को बहाल कर दी गई। आरोप है कि इससे निजी कारोबारियों को करोड़ों का फायदा हुआ और सरकार के राजस्व का सीएजी के मुताबिक करीब दो हजार (2002.68) करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इसमें सौ करोड़ रुपए की रिश्वत का आरोप है।
शराब नीति में भ्रष्टाचार होने की शिकायत मिलने पर 8 जुलाई, 2022 को मुख्य सचिव ने उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को अपनी रिपोर्ट दी। 22 जुलाई, 2022 को नियमों के उल्लंघन पर सीबीआई जांच की सिफारिश की। 19 अगस्त को सीबीआई ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत तीन लोगों के घरों पर छापे मारे। 22 अगस्त, 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब नीति पर मनीलांड्रिंग का मामला दर्ज किया। सितंबर, 2022 में सीबीआई ने आआपा के संचार प्रमुख विजय नायर को गिरफ्तार किया। मार्च, 2023 में मनीष सिसोदिया और अक्तूबर में सांसद संजय सिंह को ईडी ने गिरफ्तार किया। तभी केजरीवाल को ईडी ने पहला सम्मन भेजा। 16 मार्च, 2023 को भारत राष्ट्र समिति की नेता कविता गिरफ्तार हुईं। नौवीं बार सम्मन पर न आने के बाद 21 मार्च को ईडी ने केजरीवाल को गिरफ्तार किया। 10 मई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत दी। 02 जून, 2024 को उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर किया। 13 सितंबर, 2024 को उन्हें जमानत मिली। वे 156 दिन और सिसोदिया 530 दिन जेल में रहे। 27 फरवरी को निचली अदालत ने केजरीवाल समेत सभी को आरोप मुक्त कर दिया। हाई कोर्ट ने इसके खिलाफ सीबीआई की अर्जी पर सुनवाई शुरु कर दी है।
कांग्रेस की कमजोरी और भाजपा की अधूरी तैयारी के चलते और बिजली-पानी फ्री करने के वायदे ने आआपा को साल 2015 के चुनाव में दिल्ली विधानसभा में रिकार्ड 54 फीसदी वोट के साथ 67 सीटों पर जीत दिलवा दी। उस चुनाव के बाद पार्टी में अरविंद केजरीवाल का राजनैतिक कद और बढ़ गया। दोबारा मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने दिल्ली से बाहर पार्टी को न ले जाने का घोषणा कर दी। उन्होंने यह साबित कर दिया कि पार्टी को वोट उनके नाम से मिलते हैं। साल 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में फिर उन्होंने रिकार्ड 54 फीसद वोट के साथ 62 सीटें जीती। साल 2017 के गोवा विधानसभा चुनाव में तो आआपा को कोई सफलता नहीं मिली लेकिन पंजाब में बेहतर नतीजे मिले। 117 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को 77 सीटें और आआपा को 20 सीटें मिलीं। इस बार आआपा ने शानदार जीत दर्ज की। उसे न केवल 92 सीटें मिली और उसकी दिल्ली से बाहर सरकार बनी। गुजरात और गोवा में चुनाव लड़कर आआपा अखिल भारतीय पार्टी बन गई।
सत्ता ने उन्हें आम आदमी से खास बना दिया। नेता अरविंद केजरीवाल अपने पुराने वायदे ही नहीं भूले, आम नेताओं से आगे निकल कर सरकारी कोठी को भव्य कोठी (विपक्षी दल शीशमहल कहते हैं) बनाकर रहने लगे। दिल्ली सचिवालय के अपने आधुनिक कार्यालय में भी उन्होंने करोड़ों रुपए खर्च करके काफी बदलाव कर उसे भी आलीशान बनवाया। उन्होंने जंतर-मंतर, रामलीला मैदान कौन कहे लोगों के बीच जाना छोड़ ही दिया। सुरक्षा के भारी तामझाम के कारण लोगों से उनकी दूरी बढ़ी और जिस वीआईपी कल्चर का विरोध कर वे राजनीति में आए, उसी कल्चर के प्रतीक बन गए। कट्टर ईमानदार राजनीति का दावा करने वाले केजरीवाल और उनकी पार्टी के शराब घोटाले आदि भ्रष्टाचार में फंसने के बाद उन्हें उस जंतर-मंतर की याद आई, जहां से उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु अण्णा हजारे के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाया था।
साल 2024 का लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल ने अपने को प्रताड़ित करने का मुद्दा बनाने की असफल कोशिश की। 70 सदस्यों वाली विधानसभा के चुनाव में भाजपा 48 सीटों के साथ 27 साल बाद सत्ता में लौटी। आआपा को 22 सीटें मिली। मतों का अंतर महज दो फीसदी का था। पहली बार आआपा 2022 में दिल्ली नगर निगम चुनाव जीती थी। उसे 250 में से 134 सीटें मिली थी। भाजपा को 104 सीटें मिली थी। केन्द्र में भाजपा की सरकार होने का लाभ उसे मिलता रहा। बहुमत के बावजूद महीनों कवायत के बाद आआपा का मेयर बना। इन सालों में आआपा के पार्षद भाजपा में आते रहे। इतना ही नहीं, आआपा में जाकर पार्षद बने 16 निगम पार्षद अलग दल बनाकर आआपा से अलग हो गए। निगम में दलबदल विरोधी कानून नहीं लागू है। अब निगम में भी भाजपा बहुमत में है। केजरीवाल ने अपनी ईमानदार छवि को बचाए रखने के लिए दिल्ली सरकार में मंत्री रहे असीम अहमद खान और संदीप कुमार को भ्रष्टाचार और सेक्स रैकेट के आरोप में हटाया। शराब घोटाले ने तो पूरी पार्टी को ही लपेटे में लेकर उसे नंगा कर दिया।
आआपा पूरी तरह से अरविंद केजरीवाल की पार्टी है। वह न तो किसी विचारधारा से जुड़ी है, न जाति आधारित या कैडर आधारित पार्टी है। दिल्ली में सरकार जाने के बाद पार्टी के साथ मुट्ठी भर लोग दिखते हैं। आतिशी और सौरभ भारद्वाज के भरोसे दिल्ली में पार्टी चल रही है। इसी बीच निचली अदालत से आरोप मुक्त होने के बाद केजरीवाल फिर से दिखे लेकिन हाई कोर्ट ने उनके उत्साह को कमजोर कर दिया। कहीं ऊपरी अदालतों ने निचली अदालत के फैसले पलट दिए और जो नेता जमानत पर जेल से बाहर हैं, वे वापस कब जेल चले जाएं, कहा नहीं जा सकता। अगर ऐसा हुआ और अन्य नेताओं के साथ केजरीवाल जेल गए तो आआपा का हाल और भी बुरा होगा। दो फीसदी मतों के अंतर से सरकार बनाने वाली भाजपा दिल्ली में अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने में लगी है। कांग्रेस तो हाशिए पर पहुंच गई है। आआपा के लिए खतरा है कि कहीं भाजपा विरोधी मत कांग्रेस में न लौटने लगे, जिसके बल पर आआपा ने दिल्ली में दस साल से ज्यादा समय तक राज किया। अब सत्ता के बिना वह कब तक प्रभावशाली भूमिका में बनी रहेगी, यह कहना कठिन है।
(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने स्तंभकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश
