नाहन, 23 फ़रवरी (हि.स.)। क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं (सिरमौर) की ओर से ग्राम पातलियों में सोमवार को मधुमक्खी पालन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 50 महिला किसानों ने सहभागिता की। यह कार्यक्रम “हिमाचल प्रदेश में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सतत मधुमक्खी पालन के लिए शहद एवं अन्य मधुमक्खी उत्पाद उत्पादन मॉडल” परियोजना के अंतर्गत संपन्न हुआ।

इस परियोजना के तहत दो स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं, जिनमें “मौन पालक समूह” की अध्यक्ष निशा छनानिया और उमंग स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सीमा ठाकुर हैं। सह-निदेशक डॉ. प्रियंका ठाकुर ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए परियोजना की रूपरेखा और मधुमक्खी पालन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत अब तक पांच प्रशिक्षण कार्यक्रम (3 बुनियादी व 2 विशिष्ट प्रशिक्षण) आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे 125 किसान लाभान्वित हुए हैं।

उन्होंने बताया कि मधुमक्खियां परागण के माध्यम से फसलों की उपज और गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। उन्होंने मधुमक्खी अनुकूल पुष्प स्रोत के महत्व पर विशेष बल देते हुए बताया कि वर्षभर विभिन्न फूलों की उपलब्धता मधुमक्खी कॉलोनियों की मजबूती और अधिक शहद उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है। सरसों, लीची, नींबू वर्गीय फसलें, जंगली पुष्प एवं अन्य मौसमी फूल मधुमक्खियों के लिए उत्तम आहार स्रोत हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर
