गुवाहाटी, 26 जनवरी (हि.स.)। देशभर में 77वां गणतंत्र दिवस सोमवार को धूमधाम से मनाया गया। इसी क्रम में नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस की भव्य परेड में असम की झांकी ने अपनी सांस्कृतिक समृद्धि और पारंपरिक कला की अनूठी प्रस्तुति से सबका ध्यान आकर्षित किया। इस वर्ष परेड की शुरुआत असम की झांकी से हुई, जो राज्य के लिए गौरव का क्षण रहा।

इस बार असम की झांकी धुबड़ी जिले के आशारिकांदी क्षेत्र की प्रसिद्ध टेराकोटा कला पर आधारित थी। झांकी के आगे बढ़ने के दौरान तीन बिहुवती कलाकारों ने पारंपरिक बिहू नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाला था।
जब असम की झांकी परेड मार्ग से गुजरी, तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित यूरोपीय संघ के नेता उर्सुला वॉन डेर लेएन और एंटोनियो कोस्टा ने ताली बजाकर झांकी का अभिवादन किया।
झांकी में हीरामाटी (पवित्र मिट्टी) से बनी देव-देवियों की मूर्तियां, पारंपरिक सराई, बांस शिल्प और असम की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती मोरपंखी नाव को प्रदर्शित किया गया। इन तत्वों ने राज्य की लोककला, आध्यात्मिक परंपरा और हस्तशिल्प कौशल को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में कुल 30 झांकियां शामिल की गईं, जिनमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तथा 13 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की झांकियां थीं। सभी झांकियां ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ विषयों पर आधारित थीं।
असम की झांकी ने अपनी जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुति से न केवल दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर राज्य की समृद्ध कला और परंपरा को भी सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।————
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय
