पलामू, 28 फ़रवरी (हि.स.)। पलामू के हुसैनाबाद नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर-10 की मतगणना से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मतगणना परिणाम के आधिकारिक दस्तावेज प्रपत्र-20 में कुल मतों के जोड़ में गंभीर त्रुटि दर्ज पाई गई है, जिसने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह केवल एक वार्ड का मामला हो सकता है, लेकिन इससे पूरे मतगणना पर आशंका के बादल मंडराने का खतरा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विधिमान्य (वैध) मतों की वास्तविक संख्या 1055 है, लेकिन प्रपत्र-20 में इसे मात्र 520 दर्शाया गया है। वहीं अवैध मतों की संख्या 65 है। इस आधार पर कुल मतों की संख्या 1120 होनी चाहिए थी, लेकिन दस्तावेज में इसे 585 दर्ज किया गया है। यह अंतर कोई मामूली गणितीय भूल नहीं, बल्कि मतगणना की विश्वसनीयता पर सीधा प्रश्नचिन्ह है।

चुनाव में जब कुल मतों के जोड़ में ही इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आ रही है, तो यह आशंका स्वाभाविक है कि कहीं यही त्रुटि किसी प्रत्याशी की हार या जीत का कारण तो नहीं बन गई। नगर निकाय चुनाव में अक्सर जीत-हार का अंतर बेहद कम मतों से तय होता है। ऐसे में यदि कुल मतों का आंकड़ा ही गलत दर्ज हो जाए, तो परिणाम की निष्पक्षता संदिग्ध हो जाती है।
लोकतंत्र की मजबूती निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर निर्भर करती है। मतगणना के दौरान की गई ऐसी चूक न केवल प्रशासनिक लापरवाही दर्शाती है, बल्कि मतदाताओं के विश्वास को भी आघात पहुंचाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रपत्र-20 जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज में त्रुटि होना गंभीर विषय है और इसकी तत्काल जांच होनी चाहिए। संबंधित अधिकारियों की ओर से स्पष्टीकरण और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रत्याशी या मतदाता के साथ अन्याय न हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिलीप कुमार
