कोलकाता, 24 फ़रवरी (हि. स.)। भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सीमावर्ती और संवेदनशील जिला नदिया में एसआईआर प्रक्रिया का खुलेआम उल्लंघन किया गया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है।

अमित मालवीय ने अपनी पोस्ट में कहा कि नदिया एक ऐसा जिला है, जो बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ और मानव तस्करी की समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे जिले में मतदाता सूची की शुचिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद, वहां एसआईआर प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं होने की जानकारी सामने आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 20 फरवरी 2026 को शाम करीब सात बजे नकाशिपाड़ा ब्लॉक में जिला निर्वाचन अधिकारी अनिश दासगुप्ता (आईएएस) और अपर जिलाधिकारी (भूमि एवं राजस्व) नृपेंद्र सिंह (आईएएस) मौजूद थे। इस दौरान कथित तौर पर उन्होंने ईआरओ और एईआरओ को निर्देश दिया कि तार्किक विसंगतियों और संदिग्ध दस्तावेजों के बावजूद बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाए। आरोप यह भी है कि बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन बंद रखने का निर्देश दिया गया।
अमित मालवीय ने आशंका जताई कि इस तरह की गतिविधियां केवल नकशिपाड़ा तक सीमित नहीं हो सकतीं, बल्कि जिला प्रशासन के अधीन अन्य ब्लॉकों में भी इसी तरह की कार्रवाईयां की गई होंगी। उन्होंने कहा कि यह मामला निष्पक्ष जांच की मांग करता है और चुनाव आयोग को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने अपनी पोस्ट में एक बड़ा सवाल भी उठाया—आखिर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला राज्य प्रशासन कथित तौर पर एसआईआर प्रक्रिया में हस्तक्षेप क्यों कर रहा है? फर्जी या अवैध मतदाताओं को बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है? उन्होंने दावा किया कि यह कोई अलग-थलग मामला नहीं है, क्योंकि इसी तरह की रिपोर्टें राज्य के कई अन्य जिलों से भी सामने आ चुकी हैं।
अमित मालवीय ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में कुछ जिलों में जिला मजिस्ट्रेट, जिला स्तर पर नियुक्त न्यायिक अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में साक्ष्य कथित तौर पर सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
पोस्ट के अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला हैं, और इन्हें कमजोर करने की किसी भी कोशिश की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक गंभीरता का विषय होगा, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा आघात भी माना जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय
