सीवान, 13 मार्च (हि.स.)।सीवान जिले के जीरादेई प्रखंड क्षेत्र के नरेंद्रपुर गांव स्थित परिवर्तन परिसर में शुक्रवार को गांधी विचार पर आधारित सात दिवसीय चिंतन शिविर संपन्न हो गया। इस शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने भाग लेकर गांधी के विचारों, ग्रामीण समाज और सामाजिक बदलाव से जुड़े पहलुओं पर गहन चिंतन-मंथन किया।तक्षशिला एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा संचालित समेकित ग्रामीण पहल “परिवर्तन” के तहत यह शिविर आयोजित किया गया।

संस्था साहित्य, कला, संस्कृति और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है तथा समय-समय पर इस तरह के बौद्धिक कार्यक्रमों का आयोजन करती रहती है। पिछले सात वर्षों से परिवर्तन परिसर में सालाना कथा शिविर आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण जनजीवन और शहरी संस्कृति के बीच संवाद स्थापित करना है। 7 से 13 मार्च तक आयोजित इस वर्ष का चिंतन शिविर महात्मा गांधी के जीवन और विचारों पर केंद्रित रहा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों दिल्ली से आकाश कुमार, अनंत सिंह पुंडीर , संभाजी नगर से हरी डी. सोनुने, पुणे से कुणाल विष्णु धोंडगे , भोपाल से सबा खान ,मेलकोट, मांड्या से शशांक सी.एल., दक्षिण 24 परगना से शुभोजितनास्कर और बेंगलुरु से तान्या महेश्वरी ने भाग लिया। शिविर का मार्गदर्शन वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक और प्रोफेसर अपूर्वानंद ने किया। वहीं कथाकार वंदना राग और लेखक-चिंतक रंजन कुमार सिंह ने शिविर का संयोजन किया, जबकि अमृत राज सहयोगी की भूमिका में रहे।परिवर्तन के कार्यक्रम समन्वयक आलोक सिंह ने बताया कि शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने गांधी के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। साथ ही प्रतिभागियों ने आसपास के गांवों का भ्रमण किया और जीरादेई का भी दौरा कर स्थानीय जीवन, समाज और संस्कृति को करीब से समझने का प्रयास किया।उन्होंने बताया कि शिविर के दौरान एकत्रित अनुभवों और जानकारियों के आधार पर सभी प्रतिभागी आगामी तीन महीनों के भीतर अपनी-अपनी रचनाएं तैयार करेंगे, जिन्हें बाद में पुस्तक के रूप में प्रकाशित कर पाठकों के बीच प्रस्तुत किया जाएगा।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma
