कोलकाता, 11 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रसोई गैस आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किए बिना प्रतिबंधात्मक कदम उठाने से उपभोक्ताओं में अनावश्यक चिंता पैदा हुई है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पहले रसोई गैस, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना चाहिए था, उसके बाद ही कोई प्रतिबंध लागू करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि रसोई गैस, तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। बिना उचित योजना के प्रतिबंध लागू कर दिए गए, जिससे स्थिति संभालना मुश्किल हो गया।
रसोई गैस आपूर्ति में देरी की खबरों के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि वह गुरुवार को राज्य सचिवालय नवान्न में गैस वितरकों और अधिकारियों के साथ आपात बैठक करेंगी ताकि समस्या के समाधान और वैकल्पिक उपायों पर चर्चा की जा सके।
उन्होंने कहा कि वित्तीय कठिनाईयों के बावजूद राज्य सरकार लोगों की मदद करने के लिए तैयार है, लेकिन यदि गैस की उपलब्धता ही सीमित रहेगी तो केवल आर्थिक सहायता से समस्या का समाधान संभव नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के सामने चुनौतियां हैं, फिर भी हम लोगों की मदद का प्रयास करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अनुदान देने पर भी विचार है, लेकिन यदि गैस ही उपलब्ध नहीं होगी तो इससे भी बहुत लाभ नहीं होगा।
उन्होंने दो गैस बुकिंग के बीच न्यूनतम 25 दिन का अंतर अनिवार्य किए जाने के निर्णय को भी लोगों में घबराहट का एक कारण बताया।
उन्होंने कहा कि यह कहना कि 25 दिन पूरे नहीं होने पर गैस नहीं मिलेगी, अपने आप में घबराहट पैदा करने वाला बयान था। ऐसे निर्णय लेने से पहले विकल्पों पर भी विचार होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बजाय राजनीति पर अधिक ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कर सकता है, लेकिन देश के गैस और तेल भंडार का प्रबंधन नहीं कर पा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्पष्ट नीति के अभाव में कालाबाजारी को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिल रहा है और बढ़ती ईंधन कीमतों का असर आम लोगों पर पड़ रहा है, जिसकी अनदेखी की जा रही है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के कारण वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में भी रसोई गैस की कमी को लेकर चिंता बढ़ी है। अधिकारियों के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं को अभी भी औसतन लगभग ढाई दिन में गैस सिलेंडर मिल रहा है, जो सामान्य अवधि के समान ही है।
हालांकि फिलहाल औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को आपूर्ति में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से होटल और भोजनालय जैसे प्रतिष्ठान, जो 19 किलोग्राम के वाणिज्यिक सिलेंडरों पर निर्भर हैं, अधिक प्रभावित हुए हैं, जबकि 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर उपयोग करने वाले परिवारों पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ा है।
भोजनालय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति की समस्या जारी रही तो कामकाज प्रभावित हो सकता है और अस्थायी रूप से प्रतिष्ठान बंद करने की नौबत भी आ सकती है।
इसी बीच ईंधन लागत बढ़ने के कारण कुछ मार्गों पर ऑटो किराए और भोजनालयों में खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने की भी खबरें हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कीमतें बढ़ाने के पीछे व्यवसायों के अपने कारण हो सकते हैं, लेकिन सरकार की प्राथमिकता आम लोगों का हित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन्होंने कीमतें बढ़ाई हैं उनके अपने कारण हो सकते हैं, लेकिन हमें आम लोगों के बारे में सोचना होगा। हम बैठक कर विकल्पों पर विचार करेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
