बांदा, 10 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसहारा गोवंश के संरक्षण और किसानों की समृद्धि के लिए जो प्रयास किए हैं वे आज पूरे प्रदेश में एक मिसाल बन चुके हैं। विशेष रूप से बांदा जिला इस बदलाव की एक सुखद तस्वीर पेश कर रहा है। जहां ‘मुख्यमंत्री निराश्रित बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना’ न केवल पशुओं के लिए सहारा बनी है। बल्कि ग्रामीणों के लिए आर्थिक संबल का बड़ा आधार बन गई है। जिले की 299 गौशालाओं में 60 हजार से अधिक गोवंश पूरी तरह सुरक्षित हैं। सड़कों पर भटकने वाले पशुओं को अब सम्मानजनक जीवन मिल रहा है। सरकार की इस मंशा को जमीन पर उतारने में जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने दिन-रात एक कर दिया है जिससे किसानों की फसलें भी सुरक्षित हुई हैं और बेसहारा पशुओं को छत भी मिली है।

सरकार के इस संकल्प ने बांदा के ग्रामीण अंचलों में खुशहाली ला दी है। जो किसान कल तक आवारा पशुओं से परेशान थे आज वे ही किसान इन पशुओं को अपने परिवार का हिस्सा बना रहे हैं। सरकार द्वारा दी जाने वाली मासिक धनराशि से पशुओं के चारे का प्रबंध आसानी से हो जाता है साथ ही जैविक खेती के लिए गोबर और गोमूत्र के रूप में किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।
योजना के बारे में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शिवकुमार बैस ने इसे सरकार की एक अत्यंत कल्याणकारी पहल बताया है। डॉ. बैस ने कहा कि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना सरकार की एक बहुत ही सराहनीय और प्रभावी योजना है। इसके अंतर्गत बांदा जिले में अब तक 4381 लाभार्थियों ने आगे बढ़कर 7662 गोवंशों को गोद लिया है। सरकार की ओर से पशुपालकों को प्रति गाय 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 1500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जा रही है। योजना के नियमों के अनुसार, एक लाभार्थी अधिकतम 04 गोवंश अपने पास रख सकता है और उनका पालन-पोषण कर सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह
