
अजमेर, 15 मार्च (हि.स.)। तीर्थराज पुष्कर में आयोजित विप्र फाउंडेशन के 18वें राष्ट्रीय परिषद् अधिवेशन में ब्राह्मण समाज की पहचान और योगदान को नए वैचारिक दृष्टिकोण से स्थापित करने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया गया। अधिवेशन में “ब्राह्मण सिविलाइज़ेशनल आइडेंटिटी फ्रेमवर्क” नाम से राष्ट्रीय शोध अभियान शुरू करने की घोषणा की गई।

इस अभियान का उद्देश्य ब्राह्मण पहचान को केवल जन्म आधारित अवधारणा तक सीमित न रखकर उसे ज्ञान, नैतिकता, तप और समाज के प्रति दायित्व की परंपरा के रूप में प्रस्तुत करना होगा।
विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने कहा कि यह शोध अभियान नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज ने भारत की ज्ञान परंपरा और सभ्यता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसे एक संतुलित और शोध आधारित ढांचे में प्रस्तुत किया जाएगा।
अधिवेशन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने की मांग भी उठाई गई।
सुशील ओझा ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई जटिल शर्तों के कारण वास्तविक पात्र लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही उन्होंने प्रस्तावित यूजीसी बिल का विरोध करते हुए कहा कि सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। उनका आरोप था कि इसके पीछे ऐसी शक्तियां सक्रिय हैं जो ब्राह्मण समाज के हितों के खिलाफ काम कर रही हैं।
ओझा ने बताया कि शोध अभियान पूरा होने के बाद ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों और सुझावों को देश के प्रमुख नेताओं नरेन्द्र मोदी, सोनिया गांधी और मोहन भागवत सहित राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा।
अधिवेशन में वर्ष 2026-28 के लिए 401 सदस्यों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन भी किया गया।
पाली मूल के मुंबई निवासी उद्योगपति सत्यनारायण श्रीमाली को सर्वसम्मति से संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। वहीं पद्मभूषण पत्रकार झाबरमल्ल शर्मा के पौत्र सत्यनारायण शर्मा को पुनः मुख्य संरक्षक का दायित्व सौंपा गया।
संगठन महामंत्री डॉ. सीए सुनील शर्मा ने कहा कि संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण और कठोर निर्णय भी किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से इन निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग की अपील की।
अधिवेशन में देशभर के 40 जोनल अध्यक्षों के नामों पर भी सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई।
प्रमुख महामंत्री पवन पारीक ने संस्था के 20 सूत्रीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें शिक्षा, संस्कार और आर्थिक स्वावलंबन को समाज के विकास का मुख्य आधार बताया गया। अधिवेशन में दो महत्वपूर्ण प्रकल्पों को परशुराम ज्ञानपीठ व स्टैच्यू ऑफ स्ट्रेंथ को जोरदार समर्थन मिला। इन प्रस्तावों के समर्थन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने खड़े होकर करतल ध्वनि के साथ अपनी सहमति जताई।
राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में चित्तौड़गढ़ से सांसद सीपी जोशी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच सहित देशभर से आए कई पदाधिकारी और समाजसेवी कार्यक्रम में शामिल हुए। समारोह के अंत में नव-नियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यनारायण श्रीमाली ने सभी को साथ लेकर संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का विश्वास दिलाया। अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने समाज के विकास, शिक्षा और संगठन को मजबूत बनाने के लिए अपने विचार भी साझा किए।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित
