उरई, 10 फ़रवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद जालाैन के थाना एट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पचोखरा धाम में स्थित प्राचीन राज मंदिर नागा गद्दी को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। मंगलवार को ग्रामवासियों ने जिलाधिकारी जालौन को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि मंदिर की लगभग 39 एकड़ भूमि पर दो पुजारियों द्वारा कब्जा कर निजी उपयोग में लाई जा रही है।

इस पूरे मामले मे यहां के स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह “नागा गद्दी” के नाम से प्रसिद्ध मंदिर है, जहाँ पहले केवल एक ही पुजारी हुआ करता था। लेकिन वर्तमान में दो पुजारी गोपाल दास (गुड्डू) महंत जो श्रीराम जानकी मंदिर के पुजारी हैं, और श्री जीतू महंत, जो गृहस्थ होकर श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के महंत हैं इस मंदिर की देखरेख का दावा करते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, इन दोनों पुजारियों ने मंदिर से जुड़ी भूमि को आपस में बाँट लिया है और पिछले लगभग 50 वर्षों से मंदिर की जमीन से होने वाली आय को व्यक्तिगत उपयोग में खर्च कर रहे हैं। आरोप है कि दोनों महंतों ने मंदिर की मूल संरचना को नुकसान पहुँचाया है, जिसके चलते प्राचीन धूना और मठ का स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो गया है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मंदिर परिसर में जहां भगवान श्रीराम-जानकी विराजमान हैं, वहीं पास की छत पर एक शौचालय का निर्माण भी कर लिया गया है, जो धार्मिक दृष्टि से अनुचित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जीतू महंत, जो कि गृहस्थ हैं, अपने परिवार सहित मंदिर परिसर में निवास कर रहे हैं, जबकि नागा गद्दी पर परिवार या महिला सदस्यों का रहना परंपरा के अनुसार वर्जित है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय से अनुरोध किया है कि इन दोनों पुजारियों के सभी दस्तावेजों और रजिस्टरों की जांच कराई जाए, मंदिर की भूमि को निजी कब्जे से मुक्त कराया जाए, और ग्रामवासियों की सर्वसम्मति से एक नया योग्य पुजारी नियुक्त किया जाए। वही इस मामले को संज्ञान लेते हुए जाँच कर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विशाल कुमार वर्मा
