उरई, 05 अप्रैल (हि.स.)। जिले के नदीगांव थाना क्षेत्र से न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से आरोपित का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र दाखिल करने के आरोप में पुलिस ने जमानतदार समेत कई अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) जालौन, उरई की अदालत में विचाराधीन आपराधिक वाद संख्या 92/2023 से जुड़ा हुआ है। इस मामले में आरोपित राजीव कुमार पुत्र रामप्रसाद राय, निवासी वैशाली (बिहार) के विरुद्ध न्यायालय द्वारा गैरजमानती वारंट जारी किया गया था। वारंट की तामील के लिए थाना नदीगांव के उपनिरीक्षक हीरालाल राजपूत आरोपी के घर पहुंचे और वहां जांच-पड़ताल की। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी की मृत्यु नहीं हुई है और वह पिछले लगभग छह महीनों से घर नहीं आया है। इस संबंध में आरोपी के परिजनों ने भी लिखित रूप से बयान दिया, जिसकी रिपोर्ट दिनांक 12 मार्च 2026 को न्यायालय में प्रस्तुत की गई। इसके बावजूद आरोपी के जमानतदार राज पचौरी, निवासी ग्राम बंगरा थाना माधौगढ़ ने न्यायालय में आरोपी का मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिया। जब इस प्रमाण पत्र की जांच की गई तो वह फर्जी और कूटरचित पाया गया। आरोप है कि जमानतदार ने अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर यह फर्जी दस्तावेज तैयार कराया और न्यायालय में प्रस्तुत किया, ताकि मुकदमे को समाप्त कराया जा सके और आरोपी को लाभ पहुंचाया जा सके। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में थाना नदीगांव में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई। वही उपनिरीक्षक हीरालाल राजपूत ने इस संबंध में आवश्यक दस्तावेजों के साथ तहरीर प्रस्तुत की। वहीं, थाना नदीगांव के हेड मोहर्रिर मनोज कुमार दीक्षित ने पुष्टि की कि एफआईआर नियमानुसार दर्ज कर ली गई है। क्षेत्राधिकारी सीओ शैलेंद्र बाजपेई ने रविवार को बताया कि दिनांक 03 अप्रैल 2026 को थाना नदीगांव में अभियुक्त के जमानतदार द्वारा अभियुक्त के संबंध में मिथ्या साक्ष्य तैयार करने और न्यायालय में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र की छायाप्रति दाखिल करने के मामले में अभियोग पंजीकृत किया गया है। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद न्यायालय में फर्जी दस्तावेजों के उपयोग को लेकर प्रशासन और पुलिस सतर्क हो गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विशाल कुमार वर्मा
