नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार कानून का उल्लंघन करने वाले नाबालिगों के सुधार और पुनर्वास के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त एकीकृत परिसर का निर्माण करेगी। यह परिसर लगभग 700 बच्चों की क्षमता का होगा और इसमें उन बच्चों को रखा जाएगा, जो जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष जुवेनाइल जस्टिस एक्ट-2015 के अंतर्गत अपनी सुनवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं या उन्हें अपराध में दोषी पाया गया है। इस परिसर में ऐसे बच्चों को सामान्य जीवन से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में जुवेनाइल जस्टिस कमिटी के सदस्यों के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया। इस बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में बच्चों से जुड़े कानूनी, सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और इस बात पर सहमति बनी कि दिल्ली में कानून से संघर्षरत बच्चों के लिए समग्र, सुरक्षित और आधुनिक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे बच्चों के लिए कई होम्स बने हुए हैं। ये होम्स वर्षों पुराने हैं, इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि इन बच्चों के निवास व पुनर्वास के लिए ‘स्टेट ऑफ द आर्ट’ एकीकृत परिसर का निर्माण किया जाए। यह परिसर अलीपुर में करीब 8 एकड़ भूमि में बनाया जाएगा। परिसर में विभिन्न मामलों में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चल रही सुनवाई वाले बच्चों और प्रक्रिया पूर्ण कर चुके बच्चों आदि को रखा जाएगा। इस प्रस्तावित एकीकृत परिसर में बच्चों के लिए शिक्षा, खेल, योग, मानसिक परामर्श, व्यावहारिक सुधार और कौशल विकास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एकीकृत परिसर बच्चों के लिए सुरक्षित संरक्षण व्यवस्था के रूप में कार्य करेगा और अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक मॉडल बनेगा। यह परिसर किसी दंडात्मक व्यवस्था के रूप में नहीं बल्कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, सम्मानजनक जीवन और सुधार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की मूल भावना के अनुरूप यह व्यवस्था बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर केंद्रित होगी, न कि उन्हें अलग-थलग करने पर।
मुख्यमंत्री के अनुसार परिसर में रहने वाले बच्चों को उनकी उम्र और आवश्यकता के अनुरूप नियमित दिनचर्या, खेल गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जाएगा, जिससे उनमें आत्मविश्वास का विकास हो और वे भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर सकें। सरकार का प्रयास है कि बच्चों को ऐसा माहौल मिले, जिसमें वे भय या हीनता के बिना सीख सकें और आगे बढ़ सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव
