शिमला, 25 फ़रवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के पेंशनर्स फोरम ने कर्मचारियों और पेंशनरों के बिजली मीटर प्राथमिकता के आधार पर स्मार्ट मीटर से बदलने के निर्देशों पर कड़ा एतराज जताया है। फोरम ने इसे मनमाना, भेदभावपूर्ण और कानून के प्रावधानों के विपरीत बताया है।

फोरम के अध्यक्ष ए.एस. गुप्ता ने मुख्य अभियंता (ऑपरेशन), कांगड़ा जोन, धर्मशाला को भेजे पत्र में कहा कि हाल ही में फील्ड इकाइयों को जारी निर्देशों में बोर्ड के कर्मचारियों और पेंशनरों के पुराने मीटर पहले बदलने को कहा गया है। फोरम का कहना है कि यह व्यवस्था पारदर्शी मानकों पर आधारित नहीं है और यह बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) की भावना के खिलाफ है।

पत्र में कहा गया है कि किसी विशेष वर्ग को बिना स्पष्ट और समान रूप से लागू होने वाले मानदंड के प्राथमिकता देना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और यह प्रक्रिया भी उचित नहीं मानी जा सकती। फोरम ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कर्मचारियों और पेंशनरों के मीटर पहले बदलने से आम जनता में जागरूकता लाने की बात कही जा रही है, तो इससे उल्टा संदेश जाता है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह माने जा रहे हैं, तभी आम लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
फोरम ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि बिजली बोर्ड के कर्मचारी और पेंशनर भी राज्य के सामान्य उपभोक्ताओं की तरह ही हैं। ऐसे में किसी एक वर्ग को निशाना बनाकर विशेष निर्देश जारी करना भेदभावपूर्ण है और यह संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन भी हो सकता है। फोरम का कहना है कि मीटर बदलने की प्रक्रिया मौजूदा नीतियों, निर्देशों और वैधानिक प्रावधानों के अनुसार समान और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
पेंशनर्स फोरम ने इन निर्देशों को तुरंत वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इन आदेशों के क्रियान्वयन से कोई अप्रिय स्थिति पैदा होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
बता दें कि प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने के मुद्दे पर सियासत गरमाई हुई है। विपक्षी दल भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार पर निशाना साध रही है और इस फैसले को उपभोक्ता विरोधी बता रही है। खासतौर पर कांगड़ा जिला में स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध ज्यादा तेज बताया जा रहा है। कई स्थानों पर लोग रोजाना प्रदर्शन कर रहे हैं और मीटर बदलने की प्रक्रिया रोकने की मांग उठा रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली बिल बढ़ने की आशंका है। साथ ही उनका यह भी तर्क है कि तकनीकी खराबी की स्थिति में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ सकती है। हालांकि, विभाग की ओर से पहले कहा जाता रहा है कि स्मार्ट मीटर से बिलिंग ज्यादा पारदर्शी और सटीक होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
