उज्जैन, 12 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में रविवार को कालिदास संस्कृत अकादमी में आस्था समाज रचना सेवा अनुसंधान संस्थान के तत्वावधान में 85 वर्षीय मोनीषा छाबड़ा की तीन पुस्तकों का विमोचन हुआ। मोनीषा ख्यात साहित्यकार किशोरीरमण टंडन की बेटी और शहर के ख्यात समाजसेवी डॉ.मुल्कराज छाबड़ा की पत्नी हैं।

कार्यक्रम कीें मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ.उमा वाजपेयी थी। उन्होने कहा कि 85 वर्षीय मोनिषा को विरासत में साहित्य और संस्कृति मिली है। उन्होंने गुजराती से हिंदी में अनुवाद कर इन पुस्तकों को रचा है। साहित्य का अनुवाद करना बड़ा कठिन कार्य होता है। पुस्तक में उन्होंने भावनाओं एवं अनुभवों को सहज रूप से स्पंदित किया है।
वरिष्ठ मालवीय साहित्यकार डॉ शिव चौरसिया ने अध्यक्षता की। उन्होने कहा कि मोनिषा ने अपने पिता वरिष्ठ साहित्यकार किशोरी रमन टंडन से साहित्यिक संस्कार लिए हैं। अपने पति डॉ.मुल्कराज छाबड़ा से जीवटता की सीख ली है। व्यंग्यकार डॉ.पिलकेंद्र अरोरा ने कहा कि श्रीमती छाबड़ा ने जीर्ण शीर्ण पुस्तकों को ब्यूटीशियन की तरह सवांर कर प्रस्तुत किया है।
जादूगर महमद छैल, न्याय प्रधान मंत्री महान, देवदास अनुभव प्रकाश शीर्षक से प्रकाशित पुस्तकों पर प्रकाश डालते हुए डॉ,पंखुरी वक्त ने कहा कि तीनों पुस्तकें रोचक और पठनीय हैं। इस अवसर पर पुस्तक प्रकाशक पुष्कर बाहेती एवं आवरण पृष्ठ के चित्रकार अक्षय अमेरिया का स्वागत किया गया। विमोचन समारोह में मोनिका सहगल, गरिमा छाबड़ा, शेफाली छाबड़ा,सोनिया सहगल ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में डॉ.अरुण वर्मा,डॉ.पुष्पा चौरसिया,डॉ. राकेश ढंड, अनुभव प्रधान , राजेश सक्सेना, डॉ.पंकजा सोनवलकर,कृष्णा वर्मा,दर्शना,कामिनी जुनेजा, मधुर सहगल, अखिलेश चोरे, डॉ.अभिलाषा शर्मा उपस्थित थे। संचालन डॉ पंखुरी वक्त ने किया। आभार डॉ जफर महमूद ने माना।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल
