बरेली, 26 फरवरी (हि.स.) । ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने असम, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के मंत्रियों के हालिया बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने कहा कि मदरसों और उनसे जुड़े उलेमा को कटघरे में खड़ा करना इतिहास के साथ अन्याय है। उनका दावा है कि देश की आजादी की लड़ाई में मदरसों की अहम भूमिका रही है।

मौलाना रजवी ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ चले आंदोलनों में मदरसों से जुड़े उलेमा और छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भारत छोड़ो आंदोलन समेत विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों में धार्मिक शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों ने योगदान दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जामा मस्जिद से अंग्रेजों के खिलाफ जारी फतवों ने आजादी की लड़ाई को धार दी थी। इंकलाब जिंदाबाद के नारों के साथ कई उलेमा ने कुर्बानियां दीं, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि आज जिन मदरसों को बंद करने या आतंकवाद से जोड़ने की बातें की जा रही हैं, वे कभी राष्ट्र निर्माण की बुनियाद रहे हैं। अगर मदरसे न होते तो देश को आजादी मिलने में और अधिक समय लग सकता था। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संतुलित और तथ्यपरक बयान देने चाहिए। किसी एक समुदाय को शक की निगाह से देखना सामाजिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है।
मौलाना ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म से जोड़ना सरासर गलत है। उन्होंने महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे समुदाय को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है। आतंकवाद एक बीमारी है, जिससे मिलकर लड़ने की जरूरत है।
हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार
