– देश भर से 300 से अधिक शिक्षाविद्, अनुसंधानकर्ता, स्वतंत्र शोधकर्ता लेंगे हिस्साभोपाल, 07 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान 12 से 14 फरवरी के बीच राष्ट्रीय शोधार्थी समागम के दूसरे संस्करण का आयोजन कर रहा है।

शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश कुमार मिश्रा ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि भारत के ज्ञान, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, मानविकी सहित अलग-अलग विषयों में भारत केन्द्रित शोध को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोजित इस समागम में देश भर से 300 से अधिक शिक्षाविद्, अनुसंधानकर्ता, स्वतंत्र शोधकर्ता भाग लेंगे।

उन्होंने बताया कि भारत के पुनरुत्थान पर केन्द्रित शोध दृष्टि के प्रोत्साहन को लेकर संस्थान द्वारा राष्ट्रीय शोधार्थी समागम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। वीर भारत न्यास, संस्कृति विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय इस आयोजन के सह आयोजक हैं। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष शुरु की गई समागम की यह पहल अकादमिक विमर्श को भारत केंद्रित बनाने की दिशा में अत्यंत सार्थक सिद्ध हुई है।
समागम की आयोजन सचिव प्रो. डॉ. अल्पना त्रिवेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में अनुभव, अवलोकन, प्रयोग और विश्लेषण की व्यवस्थित प्रणाली रही है। लेकिन यह शोध परंपरा हमारी अकादमिक शोध पद्धति से विस्मृत हो गई। इस समागम के माध्यम से मानव जीवन के सभी क्षेत्रों में भारतमुखी चिंतन, शोध, अनुसंधान की गति बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि इस समागम में देश भर के 30 से अधिक शिक्षाविद् और विद्वान 14 से अधिक सत्रों को संबोधित करेंगे, संवाद करेंगे और विविध विषयों पर अपने सुझाव देंगे। समागम में प्रमुख रूप से भारत केंद्रित अनुसंधान, विचारों का आदान-प्रदान, भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रवाह, शोध रणनीति तैयार करना, शोधकर्ताओं के बीच सहयोग, विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूरा करना, शोध की गुणवत्ता, युवा शोधकर्ताओं को सशक्त बनाना, अनुसंधान और विकास के लिए नीति तथा अनुसंधान का डिजिटलीकरण विषयों पर चर्चा होगी।
सहयोगी संस्था वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि तीनदिवसीय शोधार्थी समागम भारत के वादे वादे जायते तत्वबोधः की संकल्पना को साकार करने वाला अनूठा कार्यक्रम है। इसमें राष्ट्रीय विमर्श के मुद्दों, शिक्षा नीति, धरोहरों के ज्ञान-विज्ञान, सामुदायिक-सांस्कृतिक परंपरा के नये अनुसंधान क्षेत्रों पर भी चर्चा होगी, जिससे शोध के नये द्वार खुलेंगे।
कार्यक्रम की सह आयोजक संस्था राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. चन्द्र चारु त्रिपाठी ने बताया कि इस समागम में पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश पर केंद्रित दो कार्यशालाएँ भी आयोजित होंगी। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक प्रो. अनिल कोठारी ने बताया कि समागम में शोध कार्यों में वैज्ञानिक नई अवधारणाओं और आर्टिफिशियल इंटलीजेंस के उपयोग को लेकर विशेषज्ञ विमर्श करेंगे।
आयोजन सचिव डॉ. अल्पना त्रिवेदी ने जानकारी दी कि तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में शिक्षाविद् और शोधार्थियों द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित, साझा और विस्तारित ग्रामीण, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, सतत और आर्थिक विकास में भारत केन्द्रित अनुसंधान के माध्यम से भारतीय सन्दर्भ को उपयोगी बनाने, नवाचार, बहुविषयी दृष्टिकोण का विकास, विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप अनुसंधान को बढ़ावा देने, अनुसंधान विधि और सहायता के लिए नये रास्ते तलाशने, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित और सशक्त बनाने, सार्वजनिक नीति पर शोध के प्रभाव आदि विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शोधार्थी समागम का उद्घाटन सत्र 12 फरवरी को प्रात: 10:30 बजे से मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सभागार में आयोजित किया जाएगा जिसमें माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि और प्रख्यात विचारक एवं लेखक श्री सुरेश सोनी सारस्वत अतिथि होंगे। उद्घाटन सत्र में इन्दर सिंह परमार (उच्च शिक्षा), आचार्य मिथिलेश नन्दिनीशरण (पीठाधीश्वर, सिद्धपीठ, श्रीहनुमन्निवास, अयोध्या) एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष प्रो. मधुकर एस पडवी की विशिष्ट उपस्थिति रहेगी।
विविध सत्रों में मुख्य रूप से, पद्मश्री डॉ. कपिल तिवारी (भोपाल), पद्मश्री जे. के. बजाज (चेन्नई), मुकुल कानिटकर (नागपुर), प्रो. गिरीश्वर मिश्र (वर्धा), जे. नंदकुमार (दिल्ली), प्रो. संजीव कुमार शर्मा (मेरठ), प्रो. चंद्रकला पाडिया (बनारस), स्वामी नरसिम्हानंद (कालीकट), प्रो. वी.के. मल्होत्रा (दिल्ली), डॉ. मुरलीधर चाँदनीवाला (रतलाम), प्रो. जी. एस. मूर्ति (इंदौर), प्रो. राम नाथ झा (नई दिल्ली), प्रो. सच्चिदानंद मिश्रा (आईसीपीआर दिल्ली) अपने विचार रखेंगे।
इनके अलावा प्रो. आशीष श्रीवास्तव (बीएचयू वाराणसी), प्रो. विजय मनोहर तिवारी (कुलगुरु एमसीयू भोपाल), प्रो. सी.सी. त्रिपाठी (भोपाल), प्रो. अनिल कोठारी (भोपाल), प्रो. नचिकेता तिवारी (आईआईटी कानपुर), प्रो. आशीष पाण्डे (आईआईटी मुम्बई), प्रो. यतीन्द्र सिंह सिसोदिया (उज्जैन), डॉ. अमरनाथ रेड्डी (हैदराबाद), प्रो. अंकुर जोशी (राजस्थान), आशुतोष भटनागर (दिल्ली), प्रो. आनंद बर्धन (दिल्ली) और संदीप सिंह (मुंबई) भी अपने विचार रखेंगे। साथ ही नैमिषारण्य की परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए नैमिष वार्ता का एक सत्र रखा जाएगा, जिसमें दार्शनिक आचार्य मिथिलेश नन्दिनीशरण (पीठाधीश्वर, सिद्धपीठ, श्रीहनुमन्निवास, अयोध्या) शोधार्थियों से संवाद करेंगे। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा वंदेमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष आयोजन भी होगा।__________________
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर
