धर्मशाला, 09 फ़रवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि यदि राजस्व घाटा अनुदान का बहाना बना कर प्रदेश के पेंशनरों और कर्मचारियों का महंगाई भत्ता फ्रीज करने और एरियर न देने का फैसला लिया तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर, महासचिव इंद्र पाल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा, मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी, प्रेस सचिव चेत राम वर्मा और लाइक राम शर्मा, शिमला जिला के संयोजक मोहन ठाकुर और जिला प्रधान शिमला भाग चंद चौहान ने जारी संयुक्त बयान में कहा।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की प्रदेश कार्यकारिणी की आपातकाल बैठक में उपरोक्त फैसला लिया गया कि जिस तरीके से प्रदेश के प्रधान वित्त सचिव ने सरकार को वित्तीय प्रेजेंटेशन में सुझाव दिए हैं कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान बंद होने की वजह से प्रदेश की वित्तीय स्थिति की भरपाई करने के लिए प्रदेश के पेंशनरों और कर्मचारियों का महंगाई भत्ता फ्रीज़ करना होगा और एरियर को भी नहीं दिया जा सकता है। इसके साथ ही और भी बहुत सारे फैसले लेने बारे प्रस्ताव दिए गए हैं जबकि सरकार के प्रतिनिधियों पर और सरकारी खर्चों पर अंकुश लगाने बारे कोई कटौती करने बारे प्रस्ताव नहीं हैं। प्रदेश सरकार को पेंशनरों और कर्मचारियों को 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता और 146 महीने का महंगाई भत्ते के एरियर के साथ करोड़ों रुपये की वित्तीय अदायगी करने को है। जिसमे संशोधित कम्युटेशन, ग्रेच्युटी और लीव इन कैशमेंट पहली जनवरी, 2016 से देय है। करोड़ों रुपये के चिकत्सा भत्ते की अदायगी के बिल्लों की अदायगी करने को है जबकि 500 से ज्यादा पेंशनर्स बिना पैसों के स्वर्ग सिधार गए हैं।

प्रधान वित्त सचिव ने हिमकेयर योजना, सहारा योजना को बंद करना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन में कटौती करने का जो प्रस्ताव दिया है उसकी भी समिति ने कड़े शब्दों में की है।
समिति ने सरकार द्वारा पिछले तीन वर्षों में लिए गए गलत फैसलों का, अपनी मित्र मंडली को खुश करने के लिए सरकारी खजाने की लूटमार करना और सरकार ने जो सलाहकार नियुक्त किए हैं जिनके पास तुजुर्बा नहीं है उनकी गलत सलाह से आज प्रदेश का दिवालिया निकल चुका है उसके लिए मुख्यमंत्री, उनकी सरकार और पार्टी ज़िम्मेदार है और अब जबकि सरकार वित्तीय संगट में है पेंशनरों और कर्मियों की देनदारियां नहीं दे सकती तो उन्हें अपने पदों से त्यागपत्र दे देना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
