धमतरी, 11 मार्च (हि.स.)। धमतरी जिले के नगरी ब्लाक महुआ सीजन शुरू होते ही जंगलों में आगजनी की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। महुआ के फूल जल्दी और आसानी से बीनने के लालच में कुछ ग्रामीण पेड़ों के नीचे पड़ी झाड़ियों व सूखी घास को साफ करने के लिए आग लगा देते हैं, जिसका परिणाम कई बार बड़े वनाग्नि के रूप में सामने आता है। इससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है बल्कि जंगलों में रहने वाले कई जीव-जंतु और पौधों की प्रजातियां भी जलकर नष्ट हो रही हैं।

ताजा मामला नगरी विकासखंड के ग्राम फरसिया का है। यहां महामाई मंदिर के सामने स्थित जंगल में दो दिन पहले भीषण आग लग गई। आग ने देखते ही देखते कई एकड़ क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के छोटे-बड़े पेड़-पौधे जलकर खाक हो गए। आग लगने से वन क्षेत्र को भारी क्षति पहुंची है। वन विभाग के अनुसार महुआ के पेड़ों से झड़ रहे फूलों को आसानी से इकट्ठा करने के लिए कुछ लोग पेड़ों के नीचे पड़ी सूखी पत्तियां और झाड़ियों में आग लगा देते हैं। यही आग फैलकर जंगलों में विकराल रूप ले लेती है। कई बार लापरवाही से फेंकी गई जलती बीड़ी या सिगरेट भी आग का कारण बन जाती है।
डिप्टी रेंजर इस्माइल खान ने बताया कि दो दिन पहले फरसिया के जंगल में आग लगने की सूचना मिली थी। विभाग द्वारा समय-समय पर ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें जंगल में आग न लगाने और उससे होने वाले नुकसान की जानकारी दी जाती है। इसके बावजूद कुछ लोग लापरवाही बरतते हुए जंगल में जलती बीड़ी या अन्य सुलगने वाले अवशेष फेंक देते हैं, जिससे आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि महुआ बीनने के लिए जंगल में आग न लगाएं। थोड़े से लाभ के लिए जंगलों को नुकसान पहुंचाना पूरे पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा
