जयपुर, 23 फ़रवरी (हि.स.)। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार द्वारा नौ सितम्बर 2015 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड के अतिरिक्त अन्य दस्तावेज के आधार पर भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शैक्षणिक रिकॉर्ड, नगर पालिका अथवा ग्राम पंचायत के अभिलेखों में आवेदनकर्ता की पैतृक जाति की पुष्टि होती है, तो उनका परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है।

मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुखवंत सिंह द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 22 मार्च 1977 को जारी स्पष्टीकरण के अनुसार जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए राजस्व रिकॉर्ड को प्राथमिक दस्तावेज माना गया है।
मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने जानकारी दी कि राजस्थान राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने छह अगस्त 1994 की अधिसूचना क्रमांक 54159 के माध्यम से ओढ़ जाति को राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में क्रम संख्या 42 पर शामिल किया। इसी प्रकार 12 नवंबर 1999 की अधिसूचना क्रमांक 75681 द्वारा रायसिक्ख जाति को राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में क्रम संख्या 55 पर सम्मिलित किया गया। इनका विस्तृत विवरण सदन के पटल पर रखा गया।
उन्होंने यह भी बताया कि हरियाणा राज्य से संबंधित सूचना विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी जाति को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का अधिकार केंद्र सरकार को है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेती है। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुरूप पात्र व्यक्तियों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित
