धौलपुर, 07 फ़रवरी (हि.स.)। देश के तीन राज्यों के साझा क्षेत्र में फैले चंबल अभयारण्य में जलीय जीवों की वार्षिक गणना का आगाज हो गया है। इस दौरान चंबल क्षेत्र में प्रवासी एवं अप्रवासी पक्षियों की वार्षिक गणना तथा सर्वेक्षण भी किया जाएगा। इस गणना में पूर्वी राजस्थान के धौलपुर और करौली जिले को मिलाकर बने धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व भी जोड़ा गया है। यह सर्वेक्षण 16 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें चंबल अभयारण्य के करीब 435 किलोमीटर क्षेत्र में गणना की जाएगी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण में जलीय जीवों के सर्वेक्षण तथा प्रवासी एवं प्रवासी पक्षियों की घटना का काम शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश वन विभाग का यह वार्षिक कार्यक्रम वन संरक्षक ग्वालियर लवित भारती एवं वनमंडल अधिकारी मुरैना हरिश्चंद्र बघेल के निर्देशानुसार शुरू किया गया है। इस सर्वेक्षण का नेतृत्व मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के देवरी में स्थित राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण के अधीक्षक देवरी श्याम सिंह चौहान द्वारा किया जा रहा है। अभियान की शुरुआत श्योपुर जिले के पाली क्षेत्र से हुई, जहां अधीक्षक श्योपुर संदीप वास्कले ने टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण के अधीक्षक देवरी श्याम सिंह चौहान ने बताया कि अभियान में मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश तीनों राज्यों के वन अधिकारी-कर्मचारी सहित डब्लूएलएल देहरादून, बीएनएचएस और डब्लूसीटी के विशेषज्ञ एवं स्वयंसेवी भी शामिल हैं। इस बार से गणना एवं सर्वेक्षण में चंबल नदी के साझा क्षेत्र मध्य प्रदेश के मुरैना सहित धौलपुर एवं उत्तर प्रदेश में पचनदा तक सर्वे का काम होगा। इस सर्वेक्षण में राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में बह रही चंबल में मगरमच्छ, डॉल्फन, इंडियन स्कीमर सहित जलीय एवं तटों पर पाने वाले पक्षियों की गणना की जा रही है। बताते चलें कि मध्यप्रदेश वन विभाग के तहत आने वाला राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण चंबल के जलीय जीवों एवं प्रवासी तथा प्रवासी पक्षियों की गणना कर उनका राष्ट्रीय डेटा तैयार करने के लिए हर साल फरवरी में एक पखवाड़े तक गणना करता है। इस गणना में पूर्वी राजस्थान के धौलपुर और करौली जिले को मिलाकर बने धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व भी जोड़ा गया है। मध्य प्रदेश के वन विभाग के अनुसार इस घटना एवं सर्वेक्षण से चंबल नदी में जलीय जीवों की संख्या पता चलेगी। जलीय जीवों के संरक्षण और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए यह गणना बेहद अहम मानी जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप
