रीवा, 01 मार्च (हि.स.)। मध्यप्रदेश का शांत और सुरक्षित माना जाने वाला विंध्य क्षेत्र अब साइबर अपराधियों की रडार पर आ गया है। रीवा पुलिस और गुजरात पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने शहर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित एक पॉश कॉलोनी में दबिश देकर 13 युवकों को गिरफ्तार किया है, जो किराए के आलीशान मकान को साइबर ठगी का ‘कंट्रोल रूम’ बनाकर देशभर के लोगों को निशाना बना रहे थे।

जानकारी के अनुसार यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ाता था। पुलिस को मौके से बड़ी संख्या में हाई-टेक लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी बरामद हुए हैं, जिनका उपयोग साइबर ठगी के नेटवर्क और ट्रांजेक्शन को संचालित करने में किया जाता था।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गुजरात के सूरत शहर में रहने वाले एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग के बैंक खाते से करीब 7 लाख रुपये की ठगी हो गई। बुजुर्ग ने जब इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, तो सूरत पुलिस ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की। डिजिटल ट्रैकिंग और कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच आगे बढ़ी तो साइबर ठगी की लोकेशन मध्यप्रदेश के रीवा शहर तक पहुंच गई।
इसके बाद सूरत पुलिस की टीम रीवा पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई। विश्वविद्यालय थाना प्रभारी निरीक्षक हितेंद्र नाथ शर्मा के नेतृत्व में रीवा पुलिस और गुजरात पुलिस की टीम ने करीब एक सप्ताह तक संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। पूरी जानकारी और साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने पॉश कॉलोनी स्थित मकान पर दबिश दी और मौके से 13 युवकों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। ठगी के लिए आरोपी मुख्य रूप से दो तरीकों का इस्तेमाल करते थे। पहला तरीका था संदिग्ध लिंक के जरिए एपीके फाइल भेजना। ठग लोगों को किसी ऑफर या बैंकिंग अपडेट के नाम पर लिंक भेजते थे और उन्हें मोबाइल में एपीके फाइल इंस्टॉल करने के लिए कहते थे। जैसे ही व्यक्ति वह फाइल इंस्टॉल करता, उसके मोबाइल फोन का पूरा एक्सेस ठगों के पास पहुंच जाता था और वे आसानी से बैंकिंग ऐप व अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बना लेते थे।
दूसरा तरीका ओटीपी फ्रॉड था। आरोपी खुद को बैंक अधिकारी या किसी संस्था का प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसा देते थे और उनसे ओटीपी हासिल कर लेते थे। ओटीपी मिलते ही कुछ ही पलों में पीड़ित के बैंक खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी से जुड़े ट्रांजेक्शन और नेटवर्क संचालन में किया जा रहा था। बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
हैरानी की बात यह है कि पकड़े गए सभी 13 आरोपियों की उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच बताई जा रही है और वे मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन बाहरी युवकों ने रीवा की पॉश कॉलोनी को ही अपना ठिकाना क्यों बनाया और शहर में उन्हें किसका संरक्षण मिल रहा था।
विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्र नाथ शर्मा ने बताया, “सूरत पुलिस के इनपुट के आधार पर संयुक्त दबिश दी गई, जिसमें 13 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। ये सभी युवक किराए के मकान से ऑपरेट कर रहे थे। इनके पास से डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं और मामले में वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।” पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और उनके अन्य साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी
