बरेली, 21 फरवरी (हि.स.) । महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में माइग्रेशन सर्टिफिकेट और प्रोविजनल डिग्री की फीस 200 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये किए जाने के फैसले पर शनिवार को जमकर बवाल हुआ। फीस में पांच गुना बढ़ोतरी से नाराज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने परीक्षा नियंत्रक कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। कैंपस में नारेबाजी के बीच काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना और संवाद के अचानक फीस वृद्धि का आदेश जारी कर दिया। माइग्रेशन और प्रोविजनल डिग्री उच्च शिक्षा में प्रवेश और नौकरी के लिए अनिवार्य दस्तावेज होते हैं। ऐसे में 200 की जगह 1000 रुपये वसूलना आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालना है। परिषद पदाधिकारियों ने इसे छात्र हितों के खिलाफ एकतरफा फैसला बताया।

दोपहर बाद एबीवीपी कार्यकर्ता संगठित होकर परीक्षा नियंत्रक कार्यालय पहुंचे और बढ़ी हुई फीस को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रशासनिक भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर शिक्षा को कमाई का जरिया बनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य छात्रों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन पर आर्थिक दबाव बनाना।
प्रदर्शन का नेतृत्व प्रांत मंत्री आनंद कठेरिया ने किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शुल्क वृद्धि का निर्णय तुरंत वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी शुल्क वृद्धि से पहले छात्र प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
प्रदर्शन में विभाग संगठन मंत्री विकास गोला समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। देर शाम तक परिसर में फीस वृद्धि को लेकर चर्चाएं चलती रहीं। अब सबकी नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार
